Suresh Raina | ''रैना'' बरसने को बेताब
PTI |
इसमें कोई दो राय नहीं कि रैना एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं और 19 फरवरी से शुरू हो रहे विश्वकप में अपनी असीम क्षमता का जलवा बिखेरने को तैयार। वे धोनी ब्रिगेड के अहम खिलाड़ियों में शुमार किए जाते हैं और उन्हें भरोसा है कि भारत ही वर्ल्डकप जीतने में सफल होगा।
टीम में दोहरी जिम्मेदारी : सुरेश रैना बल्लेबाजी के साथ-साथ पार्ट टाइम गेंदबाज गेंदबाजी में भी धोनी की कसौटी पर खरे उतरे हैं। क्षेत्ररक्षण तो लाजवाब है यही कारण है कि ये काबिलियत उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग पहचान देती है। विश्वकप में रैना का खेल की तीनों विधाओं में खरा उतराना निहायत जरूरी है।
क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शतकीय प्रहार : 2005 में सुरेश रैना ने पहला वनडे मैच खेला था और 2006 में ही उन्होंने 'टेस्ट कैप' पहनी थी। 25 साल के रैना ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट वनडे, टेस्ट और ट्वेंटी-20 तीनों में शतक बनाने का सम्मान अर्जित किया है।
टीम इंडिया के माइकल बेवन : रैना पर मध्यक्रम को संभालने की जिम्मेदारी रहती है। चीते जैसी चपलता के साथ गेंद पर झपटने की कला के कारण ही जानकार लोग उन्हें भारत का 'माइकल बेवन' कहने से परहेज नहीं करते। वे बाएँ हाथ से बल्लेबाजी करते हैं जबकि दाएँ हाथ से ऑफ ब्रेक गेंदबाजी करके बल्लेबाज को परेशान करने के साथ ही विकेट ले उड़ते हैं।
अपने देश में खेलने का अलग ही जज्बा : रैना ने एक इंटरव्यू में कहा कि महेन्द्रसिंह धोनी को मालूम है कि मेरा किस तरह से कहाँ उपयोग करना है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार टीम इंडिया के हाथों में विश्वकप ट्रॉफी होगी। इसकी वजह ये है कि देश में खेलने का अलग ही जज्बा होता है। भारतीय टीम बहुत अनुशासित है और हम अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करते हैं तो कोई हमें विश्वकप जीतने से नहीं रोक सकता।
...तो 2 अप्रैल को जश्न की रात : बीते तीन सालों में कप्तान धोनी और कोच कस्टर्न ने भारतीय टीम को ऊँचाई पर ले जाने में बहुत बड़ा किरदार निभाया है। इस बार भी कप्तान-कोच विश्वकप जीतने की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं और सब कुछ ठीक रहा तो टीम इंडिया 2 अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में विश्वकप को जीतकर पूरे भारत को जश्न मनाते हुए देखेगी। (वेबदुनिया न्यूज)
