बंगाल में राम मंदिर का संकल्प: शांतिपुर के पूर्व विधायक अयोध्या पहुंचे, रामलला मंदिर की रज लेकर लौटेंगे घर
पश्चिम बंगाल के शांतिपुर से आए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अयोध्या पहुंचकर श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अयोध्या की पावन मिट्टी (रज) को अपने साथ ले जाना है, जिससे पश्चिम बंगाल के शांतिपुर में एक भव्य राम मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी।
2017 से जारी है मंदिर निर्माण का संकल्प
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक ने बताया कि शांतिपुर में राम मंदिर निर्माण का प्रयास वर्ष 2017 से ही निरंतर जारी है। अब अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के बाद, बंगाल के श्रद्धालुओं की इच्छा है कि उसी तर्ज पर शांतिपुर में भी एक दिव्य धाम बनाया जाए। इसके लिए बाकायदा एक ट्रस्ट का गठन किया गया है, जो मंदिर निर्माण और वहां दी जाने वाली जन-सुविधाओं की रूपरेखा तैयार करेगा।
अयोध्या की माटी से होगा भूमि पूजन
लगभग 20 से 25 लोगों के साथ अयोध्या पहुंचे इस दल ने रामलला के दर्शन किए और मंदिर परिसर की मिट्टी एकत्रित की। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा: "हम अयोध्या की पावन मिट्टी को शांतिपुर ले जाकर वहां विधि-विधान से भूमि पूजन करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि जिस भव्यता के साथ अयोध्या में प्रभु श्री राम विराजमान हुए हैं, उसी श्रद्धा के साथ शांतिपुर में भी उनका मंदिर निर्मित हो।"
नामकरण को लेकर उठाए सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात रखते हुए एक विचारणीय मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद में ऐतिहासिक पहचान को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। उनका तर्क था कि वहां की मस्जिद का नाम 'बाबरी' के स्थान पर नवाब सिराजुद्दौला के नाम पर क्यों नहीं हो सकता, जिनका नाता सीधे तौर पर बंगाल की मिट्टी और इतिहास से रहा है।
धार्मिक पर्यटन और सुविधाएं
प्रस्तावित मंदिर केवल पूजा का केंद्र नहीं होगा, बल्कि वहां श्रद्धालुओं के लिए कई आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। यह मंदिर मुर्शिदाबाद से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा, जो आने वाले समय में बंगाल में आस्था का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।