सम्बंधित जानकारी
- दशहरा रैली में मोहन भागवत बोले, क्या मणिपुर हिंसा में सीमा पार के उग्रवादी शामिल थे?
- अयोध्या में कई दशकों से मुस्लिम परिवार बना रहा रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के पुतले
- Dussehra Wishes: दशहरा पर अपनो के साथ शेयर करें ये संदेश
- दशहरे पर फिर ताकत दिखाएंगे शिवसेना के शिंदे एवं उद्धव गुट
- विजयादशमी 2023: दशहरा पर्व पर रावण दहन के मुहूर्त, मंत्र, उपाय सहित विशेष सामग्री एक साथ
मथुरा में दशहरे पर क्यों होती है रावण आरती?
Ravan Aarti : उत्तर प्रदेश के मथुरा में सारस्वत वंश के लोगों ने मंगलवार को दशहरे के अवसर पर इस बार भी रावण दहन का विरोध करते हुए दशानन की आरती का आयोजन किया।
लंकेश भक्त मंंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत ने बताया कि दशहरे के मौके पर इस बार भी भगवान शिव के परम भक्त और भगवान श्रीराम के आचार्य त्रिकालदर्शी प्रकाण्ड विद्वान 'महाराज रावण' के पुतले के दहन का विरोध करते हुए यमुना पार पुल के नीचे स्थित रावण के मंदिर के समक्ष उसकी महाआरती की गई। फिर लंकेश के स्वरूप द्वारा भगवान शिव की विशेष आराधना की गई।
क्यों होती है रावण आरती : सारस्वत ने कहा कि भगवान श्रीराम ने आचार्य स्वरूप में रावण द्वारा पूजा कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए जामवंत को लंका में रावण के पास निमंत्रण भेजा गया था। रावण माता सीता को साथ लेकर समुद्र तट पर आया था, जहां भगवान राम ने माता सीता के साथ शिवलिंग की स्थापना कर विशेष पूजा कराई थी और लंकेश को अपना आचार्य बनाया था। लंकेश द्वारा कराई गई पूजा वाली जगह को रामेश्वरम नाम से जाना जाता है।
रावण दहन कुप्रथा : उन्होंने कहा कि रावण का पुतला दहन करना एक कुप्रथा है क्योंकि, सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति में एक व्यक्ति का एक बार ही अंतिम संस्कार किया जाता है, बार-बार नहीं। इस मौके पर लंकेश भक्त मंडल के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
