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Last Modified: मेरठ , सोमवार, 2 फ़रवरी 2026 (17:03 IST)

बजट में सौगात, महाभारत की धरती हस्तिनापुर अब खंडहर नहीं, जीवंत गाथा बनेगी

Hastinapur News
Gift to Hastinapur in budget: मेरठ जनपद का पौराणिक एवं महाभारतकालीन नगर हस्तिनापुर अब वैश्विक पटल पर अपनी ऐतिहासिक आभा बिखेरने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026 के आम बजट में इसे देश के 15 चुनिंदा पुरातात्विक स्थलों में शामिल कर विश्वस्तरीय पर्यटन एवं सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित करने की घोषणा हस्तिनापुर के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है।
 
इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत हस्तिनापुर में इंटरप्रिटेशन सेंटर, वॉकवे, तथा पुरातात्विक उत्खनन स्थलों के संरक्षण व विकास का कार्य किया जाएगा, जिससे यह प्राचीन नगरी इतिहास और आधुनिक पर्यटन का अद्भुत संगम बन सकेगी।

गौरवशाली अ‍तीत को मिलेगी पहचान

हस्तिनापुर किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पौराणिक कथाओं में इसे महाभारत काल में पांडवों की राजधानी के रूप में वर्णित किया गया है। यह नगर सदियों से भारतीय संस्कृति, सभ्यता और इतिहास का जीवंत प्रतीक रहा है। लंबे समय से यह प्रयास किए जा रहे थे कि हस्तिनापुर के गौरवशाली अतीत को वैश्विक स्तर पर उचित पहचान मिले, और अब 2026 के बजट ने इस दिशा में नई उम्मीदों का संचार किया है।
 
आम बजट में की गई घोषणा के अनुसार, देश के 15 बहुमूल्य पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण एवं विकास को गति दी जाएगी। उत्खनन से प्राप्त अवशेषों को संरक्षित करते हुए उनके माध्यम से ऐतिहासिक वॉकवे विकसित किए जाएंगे, जहाँ विभिन्न कालखंडों की गाथाओं को रोचक कथानक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए व्याख्या केंद्र (इंटरप्रिटेशन सेंटर) की स्थापना भी की जाएगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक उस युग के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिवेश को गहराई से समझ सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्खनन स्थलों को सार्वजनिक रूप से सुलभ कराने से आम जनमानस भारतीय सभ्यता की जड़ों से और अधिक निकटता से जुड़ सकेगा।
 
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 के आम बजट में भी हस्तिनापुर को आइकोनिक साइट के रूप में विकसित करने तथा 500 करोड़ रुपए की लागत से राष्ट्रीय संग्रहालय के निर्माण की घोषणा की गई थी, किंतु प्रशासनिक स्तर पर भूमि उपलब्ध न होने के कारण यह योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। वर्तमान बजट में की गई नई घोषणा से यह आशा की जा रही है कि अब हस्तिनापुर के विकास को नई गति मिलेगी।

पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनेंगे यह स्थल

हस्तिनापुर क्षेत्र के समीप स्थित उल्टाखेड़ा, रघुनाथ जी का टीला जैसे पुरातात्विक संरक्षित स्थल, साथ ही पांडेश्वर मंदिर, कर्ण मंदिर, द्रोणाचार्य आश्रम, विदुर कुटी, द्रौपदी घाट और जंबूद्वीप जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल पर्यटन हब के रूप में विकसित होकर पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। इससे न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना सकेगा।
 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि सरकार इन उपेक्षित स्थलों को मात्र खंडहरों के रूप में नहीं, बल्कि ऐसी जीवंत गाथाओं के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है जो आने वाली पीढ़ियों को भारत के गौरवशाली अतीत से जोड़ सकें। प्रस्तावित इंटरप्रिटेशन सेंटर्स के माध्यम से हस्तिनापुर के समृद्ध इतिहास, महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों और सांस्कृतिक महत्व को देश-दुनिया तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही यह क्षेत्र शैक्षिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होकर शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

क्या कहा स्थानीय सांसद चौहान ने?

सांसद चंदन चौहान ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उनके स्वर्गीय पिता संजय चौहान ने बिजनौर के सांसद रहते हुए संसद में अनेक अवसरों पर हस्तिनापुर के विकास का मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाया था। उन्हीं के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने स्वयं भी संसद में नियम 377 के अंतर्गत इस विषय को उठाया, जिस पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
 
बजट में की गई इस घोषणा का हस्तिनापुर एवं आसपास के क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों और आम जनमानस ने खुले दिल से स्वागत किया है। सभी का मानना है कि सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य बनने से क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे। होटल उद्योग, गाइड सेवाएं, हस्तशिल्प, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों में व्यापक विकास की संभावनाएं हैं। आने वाले वर्षों में हस्तिनापुर निश्चय ही देश के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी एक विशिष्ट और स्थायी पहचान बनाएगा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala