न खाता न बही और जो हम कहें वो सही...। यही तेवर हैं पुनर्जन्म दिखाने वाले टीवी शो के। एक हैं तृप्ति जैन। इन मुहतरमा का दावा है कि ये पिछला जनम याद दिलाती हैं। सो कैसे? कि सुन रखे हैं माँ अमृत साधना के टेप। ओशो की शिष्या माँ अमृत साधना ने एक सीडी निकाली है। इस सीडी का नाम है "टॉकिंग टू बॉडी एंड माइंड"। इस सीडी को तृप्ति जैन ने पूरा कॉपी कर लिया है। वही शैली, वही आवाज और वैसे ही लंबे-लंबे पॉज़...। अध्यात्म की दुनिया में इन दिनों जितनी नकल ओशो की चल रही है, उतनी किसी और की शायद ही कभी चली हो। ओशो के सक्रिय ध्यान को बहुत से ढोंगियों ने तोड़ मरोड़ कर जीने की कला और न जाने क्या-क्या बना मारा है।
तो गुरु के माल पर तो सभी हाथ साफ कर रहे हैं, तृप्ति जैन ने शिष्या के घर डकैती डाल दी। चैनल वालों ने एक महिला की याददाश्त वापस लाने का दावा किया। महिला ने बताया कि वो अमुक तारीख को अमुक हवाई जहाज में सवार थी। फिर जहाज क्रेश हो गया। उस जहाज में होमी जहाँगीर भाभा भी सवार थे। पुराने अखबार निकाल कर किसी को भी तोते की तरह पढ़ाया जा सकता है कि कैमरे के सामने ये-ये बातें बोलना है। इस इत्तफाक पर भी वारे जाइए कि पहला ही केस चैनल को ऐसा मिला कि होमी जहाँगीर भाभा उसके साथ मरे थे। तो चैनल वाले होमी जहाँगीर भाभा को ही क्यों नहीं ढूँढते?
नीम हकीमी ये कि इसके जरिए फोबिया का इलाज करने का भी दावा किया जा रहा है। ऊँचाई, आग, पानी से डरना कोई बुरा नहीं है। मगर इसमें यह खोज निकालना कि पिछले जनम में चूँकि आप ऊँचाई से गिर कर मरे थे सो इस जनम में...। सबसे ज्यादा आदमी तो बीमार होकर बिस्तर पर मरते हैं। तो क्या ऐसे आदमी को आग, पानी और ऊँचाई से डर नहीं होता। डर सभी के मन में होता है। इसके बगैर तो आदमी मर ही जाए।
तृप्ति जैन अगर इतनी ही काबिल हैं, तो रवीन्द्रनाथ टैगोर को ढूँढ निकालें, ताकि बढ़िया कविता हो सके। मीर-गालिब को ढूँढ निकालें, ताकि वे बढ़िया शायरी कर सकें। अल्बर्ट आइंस्टीन को ढूँढ निकालें ताकि विज्ञान की सेवा हो। पिछला जनम याद आते ही क्या उस जनम की और बातें, और खूबियाँ याद नहीं आ सकतीं? कुल मिला कर यह शो में एक बहुत बड़ी ठगी और गुमराही की आशंकाएँ दिखाई पड़ रही हैं। इससे बचने का आसान तरीका यही है कि देखते समय अपना दिमाग पहन लिया जाए।