आदित्य रेडिज जो कि 'न आना इस देस लाडो' में राघव या फिर अम्मा जी के बेटे के नाम से पहचाने जा रहे हैं। वो हकीकत में एक कलाकार ही नहीं बल्कि एक समाज सुधारक भी हैं।
जी हाँ, शायद आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस धारावाहिक में अभिनय करने से पूर्व वो एक समाज सुधारक थे और यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत भारत के 9 होनहार युवाओं की टीम के साथ कनाडा गए थे।
वहाँ उन्हें कुछ परिवारों के साथ रहना था और उनके साथ उनके दैनिक कार्यों जैसे खेती आदि के कामों में हाथ बँटाना था। जब आदित्य से गरीब परिवारों के साथ रहने के उनके अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा 'गरीब परिवारों के साथ रहना, उनके साथ काम में हाथ बँटाना, उनकी जीवनशैली के बारे में समझना आदि हम सभी के लिए वाकई में एक बहुत अच्छा व एकदम नया अनुभव था।'
उनके साथ एक महीने से अधिक का समय बिताकर जब आदित्य भारत लौटे और गरीबों की सहायता व समाजसेवा के काम में जुट गए। यहाँ तक कि इस दरमियान वो हरियाणा के गाँवों के ग्रामीणों के साथ भी रहें। उनके लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था कि 'लाडो' की कहानी भी हरियाणा के ग्रामीण रीति-रिवाजों व उन लोगों पर आधारित है जिनके साथ वह 3 महीने तक रहे था।
आदित्य हरियाणा के गाँवों में अक्सर स्कूल में पढ़ाया करते थे तथा महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करते थे। उसके बाद वे मुंबई आए और यहाँ उन्होंने एक फैशन शो में हिस्सा लिया।
जब उन्हें इस शो में काम करने का ऑफर मिला तो वे इस बात को लेकर बहुत अधिक खुश थे कि इस शो के माध्यम से वे लोगों को वही संदेश देंगे जो वास्तव में वे उन्हें देना चाहते हैं।
आदित्य ने कहा 'मैं इस शो का हिस्सा बनकर बनकर बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ। जैसा कि हम जानते हैं कि गाँवों में आज भी कई प्रकार की कुरीतियाँ प्रचलित हैं। मैं ऐसे गाँवों में ग्रामीणों के साथ रह चुका हूँ। अत: मैंने इन कुरीतियों को बहुत करीब से देखा व जाना है। मुझे लगता है कि इस तरह के शो हमारे समाज की सोच व स्तर को बदलने में निश्चित तौर पर प्रभावी सिद्ध होंगे।'
यह बहुत अच्छी बात है आदित्य कि आप लोगों को एक बढ़िया संदेश दे रहे हैं।