तमिलनाडु चुनाव: ऐतिहासिक मतदान से राजनीतिक गलियारों में हलचल, जानें क्या है रिकॉर्ड वोटिंग का कारण
TamilNadu Voting : तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 84.69 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। आजादी के बाद तमिलनाडु का यह सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है। इससे पहले 2011 में राज्य में 78.29 फीसदी मतदान हुआ था। 2021 के विधानसभा चुनावों में तमिलनाडु में 73.63 फीसदी वोटिंग हुई थी।
राज्य में मतदाताओं में सुबह से ही मतदान को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। नेताओं और अभिनेताओं के साथ ही महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भी बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। 85.76 फीसदी महिलाओं और 83.57 फीसदी पुरुषों ने वोटिंग की। करूर जिले में सबसे ज्यादा 91.86 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले जबकि चेन्नई में 83.09 फीसदी वोटिंग हुई। राज्य में इस बार करीब 12 फीसदी वोटिंग ज्यादा हुई है। इसकी एक वजह SIR भी मानी जा रही है। इसके माध्यम से करीब 74 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीएमके से कोलाथुर सीट से चुनाव लड़ा। यहां 85.63 फीसदी वोट डाले गए। 2021 के चुनाव में यहां 64.6 फीसदी मतदान हुआ था। भारी मतदान से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई।
इस चुनाव में थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि युवाओं में विजय की लोकप्रियता ने नए वोटर्स को बूथों तक खींचने का काम किया है। तमिलनाडु की राजनीति में महिलाएं हमेशा से गेमचेंजर रही हैं। महिलाओं के मतदान प्रतिशत से भी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ती नजर आ रही है। बहरहाल बंपर मतदान के बाद सभी की नजरें 4 मई को आने वाले परिणामों पर सभी की नजरें हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा- 1947 में देश आजाद होने के बाद से आज तक देश में इतने बड़े पैमाने पर वोटिंग कभी नहीं देखी गई। यानी ये एक ऐतिहासिक दिन था।
edited by : Nrapendra Gupta
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