विजेंदर का अगला मुकाबला 13 फरवरी को
नई दिल्ली। जब अधिकतर लोग नए साल की पूर्व संध्या पर पार्टी मनाने की तैयारियों में जुटे हैं, तब स्टार भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह 13 फरवरी को लिवरपूल में होने वाले अपने अगले पेशेवर मुकाबले की अच्छी तरह से तैयारियां करने के लिए एक अच्छे जिम की तलाश में जुटे हैं।
कुछ दिन के अवकाश पर भारत आए विजेंदर ने अब तक अपने सभी मुकाबले नॉकआउट में जीते हैं। वे 4 जनवरी को वापस ब्रिटेन रवाना हो जाएंगे। विजेंदर ने कहा कि मेरा अगला मुकाबला 13 फरवरी को होगा। प्रतिद्वंद्वी का अभी पता नहीं चला है, लेकिन मैं लगातार अभ्यास कर रहा हूं। अभी मैं अपने रूटीन अभ्यास के लिए एक जिम ढूंढ रहा हूं।
नववर्ष की पूर्व संध्या पर जिम बंद हो सकते हैं, क्योंकि लोग पार्टी में व्यस्त रहेंगे, लेकिन मैं किसी से आग्रह करके कुछ समय के लिए जिम की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए कहूंगा।
उन्होंने कहा कि मैं इसे सहजता से नहीं ले सकता हूं। मैं कसरत किए बिना नहीं रह सकता हूं इसलिए लोगों को पार्टी करने दो, मैं तो जिम में पसीना बहाऊंगा। इस 30 वर्षीय मुक्केबाज ने अपने पेशेवर करियर के शुरू में अपने सभी मुकाबले 3 राउंड के अंदर जीते।
उनके पहले 2 मुकाबले 4 राउंड के जबकि तीसरा 6 राउंड का था। उनका अगला मुकाबला 8 राउंड का हो सकता है लेकिन भारत की तरफ से मुक्केबाजी में ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप का पदक विजेता कम से कम राउंड में जीत दर्ज करना चाहता है।
अब तक इस मुक्केबाज ने जिन प्रतिद्वंद्वियों का सामना किया उनके मुक्के नहीं बल्कि जबान ज्यादा तेज चली। जहां सोनी वाइटिक ने उन्हें चोट पहुंचाने की बात की थी, वहीं सामेट हुसीनोव ने वादा किया था कि वे उसका नाक-मुंह तोड़कर भारत वापस भेज देंगे। आखिर में इन सभी ने जब रिंग में विजेंदर के मुक्कों की मार झेली तो उन्हें रैफरी ही बचा पाया।
विजेंदर से पूछा गया कि क्या यह निराशाजनक है कि अभी तक उनका सामना ऐसे मुक्केबाजों से हुआ है, जो कि बड़ी बातें करते हैं लेकिन मुकाबला नहीं कर पाते हैं? उन्होंने कहा कि यह वास्तव में मेरे लिए अच्छा है कि वे मुकाबले से ही बहुत अधिक बातें करते हैं और फिर मैं उन्हें रिंग के अंदर चित कर देता हूं।
विजेंदर ने कहा, मैं हमेशा जल्द से जल्द जीत दर्ज करने पर ध्यान देता हूं इसलिए मुझे खुशी है कि मैंने बड़बोले प्रतिद्वंद्वियों का सामना किया, जो वास्तविक मुकाबले में कुछ नहीं कर पाए।
बड़ी जीतों के अलावा विजेंदर का ब्रिटेन में साथी मुक्केबाजों से मिले फीडबैक से भी मनोबल बढ़ा। उन्होंने कहा कि सभी ने ईमानदारी से अपनी बात रखी है। मेरे साथी मुक्केबाजों को जब लगा कि मैंने गलत किया तो उन्होंने मेरी आलोचना की। इससे मुझे काफी मदद मिली। (भाषा)