Last Updated :नई दिल्ली , शनिवार, 19 दिसंबर 2015 (14:54 IST)
विफल रही है आई लीग : बाईचुंग भूटिया
नई दिल्ली। पूर्व कप्तान और अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के मौजूदा सलाहकार बाईचुंग भूटिया ने स्वीकार किया है कि 8 साल पुराना आई लीग फुटबॉल टूर्नामेंट विफल रहा है और उनका मानना है कि ‘सफल’ इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के आई लीग के साथ संभावित विलय से पहले आईएसएल को कुछ और सत्र देने चाहिए।
वर्ष 2011 में संन्यास लेने से पहले लंबे समय तक भारतीय फुटबॉल के शीर्ष स्टार रहे और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले भूटिया ने कहा कि आई लीग दर्शकों और मीडिया को आकर्षित करने में नाकाम रही है जबकि दो सत्र पुरानी आईएसएल इसमें सफल रही है।
शुक्रवार को रात यहां भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भूटिया ने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो आई लीग सफल नहीं थी और यही कारण है कि आईएसएल आई। फुटबॉल प्रशंसक आई लीग के मैच देखने नहीं आ रहे थे, मीडिया उन्हें (आई लीग मैच) कवर नहीं करना चाहता था।
उन्होंने कहा कि आई लीग अगर सफल होती तो आईएसएल नहीं आती। आई लीग विफल रही और इसलिए आईएसएल शुरू हुई और हमने देखा है कि अब तक यह (आईएसएल) सफल रही है।
आई लीग और आईएसएल के संभावित विलय की चर्चाओं के बीच भूटिया से जब इस बारे में पूछा गया तो सलाहकार के अलावा एआईएफएफ की तकनीकी समिति के प्रमुख की भी भूमिका निभा रहे इस पूर्व कप्तान ने कहा कि उन्हें तुरंत इन दो लीगों के विलय की संभावना नजर नहीं आती।
खेल में योगदान के लिए पिछले महीने एशियाई फुटबॉल हाल ऑफ फेम में शामिल किए गए भूटिया ने कहा कि मैं चाहता हूं कि आईएसएल हो। अगले साल मुझे लगता है कि आईएसएल में मौजूदा 5 की जगह 6 भारतीय होने चाहिए। इसके बाद 2 या 3 साल में विदेशी खिलाड़ियों की संख्या 4 कर देनी चाहिए, जो आई लीग में मौजूदा नियम है। इसके बाद ही हम 2 लीग के विलय के बारे में सोच सकते हैं।
भूटिया ने कहा कि जब तक युवा विकास कार्यक्रम पर जोर नहीं दिया जाता, तब तक देश में फुटबॉल की स्थिति में सुधार नहीं होगा।
इस चर्चा में 2006-12 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे गौरमांगी सिंह और आईएसएल टीम नॉर्थ-ईस्ट यूनाइटेड के गोलकीपर टीपी रहनेश के अलावा आई लीग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनंदो धर ने भी हिस्सा लिया। (भाषा)