क्रिकेट में हमेशा याद रहेगी 'दादागिरी'

नई दिल्ली (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 10 नवंबर 2008 (21:36 IST)
अपने पहले अंतरराष्ट्रीय दौरे में ही सिर्फ एक 'न' के कारण दुनिया भर की नजरों में हठी और घमंडी बनने वाले गांगुली अपनी अदम्य इच्छाशक्ति से न सिर्फ ऑफ साइड के भगवान और देश के सबसे सफल कप्तान बने, बल्कि उन्होंने तमाम विपरीत परिस्थितियों में वापसी का जज्बा दिखाकर दुनिया भर के क्रिकेटरों और खेल प्रेमियों को अपना कायल भी बनाया।

गांगुली यानी 'महाराज' को कुछ ने भले ही नकारात्मक रूप में पेश करने की कोशिश की हो लेकिन बायें हाथ यह बल्लेबाज वास्तव में के महाराज थे, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को उस मुकाम पर पहुँचाया, जिसकी उनके आगमन से पहले सिर्फ कल्पना की जाती थी।
बाएँ हाथ के इस बल्लेबाज को लेकर कई सवाल उठते रहे लेकिन कोई इस बात को नहीं नकार सकता कि वह भारत के सबसे सफल कप्तान हैं। भारत को दूसरी टीमों में आतंक पैदा करने वाली टीम उन्होंने बनाया तथा एकदिवसीय क्रिकेट के वह सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में हमेशा शामिल रहेंगे।

कोलकाता के महाराज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में आज चौथे टेस्ट मैच में आखिरी बार अंतरराष्ट्रीय मैच में खिलाड़ी के तौर पर मैदान पर दिखे।
इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट के एक स्वर्णिम अध्याय का भी अंत हो गया, जिसमें इस महान बल्लेबाज ने कई उपलब्धियाँ हासिल की कई उतार-चढ़ाव देखे और कई विवादों से उनका वास्ता पड़ा।



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