उज्जैन के हर नाम में एक कथा छुपी है... जरूर पढ़ें

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प्रतिकल्पा- 'पृथ्वी पर प्रलय और सृष्टि का चक्र चलता रहता है। पुराणों की विचारधारा के अनुसार प्रत्येक कल्प से सृष्टि का आरंभ होता है। 'कल्प' से तात्पर्य यह दिया गया है कि ब्रह्मा के दिव्य सहस्र युग का एक दिन कल्प कहलाता है। इस महाकाल वन में ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों निवास करते हैं। प्रत्येक कल्प में सृष्टि का आरंभ यहीं से होता है। वामन, वाराह, विष्णु और पितरों आदि के जो भिन्न-भिन्न कल्प कहे गए हैं, वे सभी यहीं से प्रारंभ हुए। इस वन में 84 कल्प व्यतीत हो गए हैं, उतने ही ज्योतिर्लिंग यहां विद्यमान हैं। समस्त सृष्टि की उत्पत्ति एवं विनाश होने पर भी यह नगरी सदैव अचल रही है अत: यह प्रतिकल्पा नाम से विख्यात होगी, ऐसा ब्रह्मा ने कहा और यह प्रतिकल्पा नाम से प्रसिद्ध हुई।' 



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