किसके पास था कौन-सा दिव्य धनुष, जानिए

अनिरुद्ध जोशी|
विश्व के प्राचीनतम साहित्य संहिता और अरण्य ग्रंथों में इंद्र के वज्र और धनुष-बाण का उल्लेख मिलता है। भारत में धनुष-बाण का सबसे ज्यादा महत्व था इसीलिए विद्या के संबंध में एक उपवेद धनुर्वेद है। नीतिप्रकाशिका में मुक्त वर्ग के अंतर्गत 12 प्रकार के शस्त्रों का वर्णन है जिनमें धनुष का स्थान सर्वोपरि माना गया है।
 
भारत में महाभारत काल और उससे पूर्व के काल में एक से एक बढ़कर धनुर्धर हुए हैं। एक ऐसा भी धनुर्धर था जिसको लेकर द्रोणाचार्य चिंतित हो गए थे और एक ऐसा भी धनुर्धर था, जो अपने एक ही बाण से दुश्मन सेना के रथ को कई गज दूर फेंक देता था। धनुर्धर तो बहुत हुए हैं, लेकिन एक ऐसा भी धनुर्धर था जिसकी विद्या से भगवान कृष्ण भी सतर्क हो गए थे। फिर भी इन इन सभी के तीर में था दम लेकिन सर्वश्रेष्ठ तो सर्वश्रेष्ठ ही होता है।
 
 
आखिर भारत में किस तरह धनुष-बाण की शुरुआत हुई और किस तरह एक से एक चमत्कारिक धनुष- बाण के आविष्कार हुए, यह एक रहस्य ही है। महाभारत काल के सभी योद्धाओं के पास विशेष प्रकार के धनुष हुआ करते थे और इनके धनुष-बाण के नाम भी होते हैं। हर एक धनुष के बाण की अपनी एक अलग ही शक्ति होती थी। आओ जानते हैं ऐसे ही 10 धनुष और बाणों के बारे में।
 
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