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चार वेद, जानिए ऋग्वेद में क्या है...

मंगलवार,जुलाई 30, 2019
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पुराणों पर मध्यकाल से ही विवाद होता आया है। अंग्रेज काल में अंग्रेजों ने इसे अप्रमाणिक ग्रंथ कहना शुरू किया था फिर उनका अनुसारण हमारे यहां के तथाकथित इतिहासकारों ने भी किया। कहते हैं कि इस दुष्प्रचार के चलते ही आर्य समाज के लोग भी ऐसा ही मानते हैं।
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अधिकतर हिंदुओं के पास अपने ही धर्मग्रंथ को पढ़ने की फुरसत नहीं है। वेद, उपनिषद पढ़ना तो दूर वे गीता तक को नहीं पढ़ते जबकि गीता को एक घंटे में पढ़ा जा सकता है। हालांकि कई जगह वे भागवत पुराण सुनने या रामायण का अखंड पाठ करने के लिए समय निकाल लेते हैं ...
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दुनिया के प्रथम ग्रंथ वेद में आज तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ। इसका कारण है उसके छंदबद्ध होने की अद्भुत शैली और वेदपाठ करने की खास विधि। यही कारण है कि
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वेद 4 हैं- यथाक्रम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। पुराण 18 हैं- यथाक्रम ब्रह्म, पद्म, वैष्णव, वायव्य (शैव), भागवत, नारद, मार्कण्डेय, आग्नेय, भविष्य, ब्रह्मवैवर्त, लैंग (लिंग), वराह, स्कंद, वामन, कौर्म (कूर्म), मतस्य, गरूड़, ब्रह्मांड। उपनिषद ...
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वेद दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ है। इसी के आधार पर दुनिया के अन्य मजहबों की उत्पत्ति हुई जिन्होंने वेदों के ज्ञान को अपने अपने तरीके से भिन्न भिन्न भाषा में प्रचारित किया। वेद ईश्वर द्वारा ऋषियों को सुनाए गए ज्ञान पर आधारित है इसीलिए इसे श्रुति कहा ...
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वेद की मानें या पुराण की?

शुक्रवार,जुलाई 15, 2016
उत्तर : हिन्दू धर्म के एकमात्र धर्मग्रंथ है वेद। वेदों के 4 भाग हैं- ऋग, यजु, साम और अथर्व। इन वेदों के अंतिम भाग या तत्वज्ञान को उपनिषद और वेदांत कहते हैं। इसमें ईश्वर संबंधी बातों का उल्लेख मिलता है। उपनिषद या वेदांत को ही भगवान कृष्ण ने संक्षिप्त ...
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महाभारत युग में युद्ध और उस काल की विषम परिस्थितियों में भी ज्ञान की गंगाएं बही थीं। महाभारत को पंचमवेद कहा गया है। महाभारत में वह सबकुछ है जो आप सोच सकते हैं और वह सब कुछ भी है तो कोई दूसरा सोच सकता है। आओ जानते हैं कि महाभारत में युद्ध और गीता के ...
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दार्शनिकों, संतों, साहित्यकारों, नीतिज्ञों और वैज्ञानिकों के विचारों को पढ़कर जीवन में बहुत लाभ मिलता है। मौर्यकाल में जहां नीतिज्ञों में चाणक्य का नाम विख्यात था, वहीं दार्शनिकों और मनोवैज्ञानिकों में पाणिनी और पतंजलि का नाम सम्मान के साथ लिया जाता ...
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ये तो सभी जानते हैं कि वेद ही हिन्दुओं के धर्मग्रंथ हैं। वेद 4 हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। उक्त चारों वेदों के ज्ञान को व्यवस्थित या विषयबद्ध कर ऋषियों ने लोगों को समझाया। जिस ऋषि ने वेदों के ज्ञान को अपने तरीके से लिखा उसके नाम पर एक ...
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हिन्दू धर्मग्रंथ 'वेद' को जानिए...

शुक्रवार,अक्टूबर 31, 2014
वेद मानव सभ्यता के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं। वेदों की 28 हजार पांडुलिपियां भारत में पुणे के 'भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट' में रखी हुई हैं। इनमें से ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियां बहुत ही महत्वपूर्ण हैं जिन्हें यूनेस्को ने विश्व विरासत ...
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हिन्दू धर्मग्रंथ वेद और शूद्र

मंगलवार,सितम्बर 2, 2014
वेदों के बारे में फैलाई गई भ्रांतियों में से एक यह भी है कि वे ब्राह्मणवादी ग्रंथ हैं और शूद्रों को अछूत मानते हैं। जातिवाद की जड़ भी वेदों में बताई जा रही है और इन्हीं विषैले विचारों पर दलित आंदोलन इस देश में चलाया जा रहा है। लेकिन इन विषैले विचार ...
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वेदों के बाद मनुस्मृति को हिन्दुओं का प्रमुख ग्रंथ माना गया है। मनुस्मृति में वेदसम्मत वाणी का खुलासा किया गया है। वेद को कोई अच्छे से समझता या समझाता है तो वह है मनुस्मृति। यह मनस्मृति पुस्तक महाभारत और रामायण से भी प्राचीन है।
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पुराण किसने लिखे, कब लिखे, कितनी है पुराणों की संख्‍या और क्या यह अप्रमाणिक ग्रंथ हैं? दूसरा सवाल कि क्या पुराणों में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं? तीसरा सवाल कि क्या पुराण काल्पनिक ग्रंथ हैं? ऐसे कई सवाल हैं जिनता हम जबाब देंगे। फिलहाल जानिए ...
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पुरान मिथ्‍या या सच, जानिए

बुधवार,जुलाई 30, 2014
वेद और पुराण में भेद है। इतिहास और पुराण में भी भेद है। वेद और स्मृतियों और संहिताओं में भी भेद हैं। हिंदुओं को यह अच्छे से जान लेना चाहिए कि पुराण, रामायण, महाभारत, स्मृतियां, संहिताएं आदि सभी धर्मग्रंथ नहीं है। धर्मग्रंथ तो सिर्फ वेद ही है।
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वेदों में एक भी ऐसा मंत्र नहीं लिखा है कि जो ईश्वर के अनेक होने की घोषणा करता हो। वेदों के अनुसार ईश्वर और मानव के बीच किसी 'एजेंट' की जरूरत नहीं है। जैसे कि अन्य धर्मों में प्रॉफेट, गुरु या धर्मगुरु होते हैं। ईश्वर का कोई पुत्र नहीं है और ईश्वर का ...
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''वह परम पुरुष जो निस्वार्थता का प्रतीक है, जो सारे संसार को नियंत्रण में रखता है, हर जगह मौजूद है और सब देवताओं का भी देवता है, एक मात्र वही सुख देने वाला है। जो उसे नहीं समझते वो दुःख में डूबे रहते हैं, और जो उसे अनुभव कर लेते हैं, मुक्ति सुख को ...
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वेद मानव सभ्यता के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं। वेदों की 28 हजार पांडुलिपियां भारत में पुणे के 'भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट' में रखी हुई हैं। इनमें से ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियां बहुत ही महत्वपूर्ण हैं जिन्हें यूनेस्को ने विश्व विरासत ...
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वेद संसार की प्रथम धार्मिक, वैज्ञानिक, सामाजिक और राजनीतिक पुस्तक है। वेदों में सबकुछ है। वेद से बाहर कुछ भी नहीं। वेदों को ईश्वर की वाणी माना जाता है। ईश्वर की इस वाणी के पहली बार चार ऋषियों ने सुना था- अग्नि, वायु, अंगिरा और आदित्य।
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