9 घंटे की पूछताछ के बाद ममता के भतीजे अभिषेक ने कहा, ना डरेंगे ना ही झुकेंगे...

पुनः संशोधित सोमवार, 6 सितम्बर 2021 (23:47 IST)
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के सांसद एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे बनर्जी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में सोमवार को यहां लगभग 9 घंटे तक पूछताछ की।
अभिषेक बनर्जी (33) मध्य दिल्ली में जाम नगर हाउस स्थित केन्द्रीय एजेंसी के कार्यालय से रात 8 बजे से थोड़ी देर पहले बाहर निकले। वह सुबह 11 बजे से कुछ पहले कार्यालय पहुंचे थे। बनर्जी ने ईडी के कार्यालय से बाहर आने के बाद भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि निरंकुश शासन की हार होगी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी से पूरी ताकत से मुकाबला करेगी।

अभिषेक से ईडी कार्यालय में करीब 9 घंटे तक पूछताछ की गई। अधिकारियों ने बताया कि मामले के जांच अधिकारी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत बनर्जी का बयान दर्ज किया। ऐसा समझा जाता है कि उनसे मामले के अन्य आरोपियों से संबंधों और दो कंपनियों के बारे में पूछा गया जो कथित तौर पर उनके परिवार से संबंधित हैं जिनमें कुछ कथित अवैध लेन-देन हुआ था।
अभिषेक बनर्जी लोकसभा में डायमंड हार्बर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव हैं। ईडी ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की नवंबर, 2020 की एक प्राथमिकी पर गौर करने के बाद पीएमएलए की आपराधिक धाराओं के तहत संबंधित मामला दर्ज किया था। सीबीआई की प्राथमिकी में आसनसोल और उसके आसपास कुनुस्तोरिया और कजोरा इलाकों में ‘ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ की खदानों से संबंधित करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले का आरोप लगाया गया है।
ईडी कार्यालय के बाहर बनर्जी ने कहा कि अगर भाजपा को लगता है कि तृणमूल कांग्रेस (ईडी के मामलों और पूछताछ से) डर जाएगी या झुक जाएगी या कांग्रेस अथवा किसी अन्य पार्टी की तरह घर बैठ जाएगी तो ऐसा हरगिज नहीं होगा। हम आपके खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे और हर ऐसे राज्य में जाएंगे जहां आपने लोकतंत्र की हत्या की। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में टीएमसी भाजपा को हराएगी।

पश्चिम बंगाल में स्थानीय कोयला संचालक अनूप मांझी उर्फ ​​लाला इस अवैध लेन-देन में प्रमुख आरोपी है। ईडी ने दावा किया था कि अभिषेक बनर्जी इस अवैध लेद-देन से प्राप्त धन के लाभार्थी थे। उनकी पत्नी रुजिरा को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत समन भेजकर एक सितंबर को पेश होने को कहा गया था। हालांकि रुजिरा ने मौजूदा कोरोना वायरस का हवाला देते हुए एजेंसी से उनसे कोलकाता में ही पूछताछ करने का अनुरोध किया।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के कुछ अधिकारियों और अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक वकील को भी इस महीने अलग-अलग तारीखों पर पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। ईडी ने मामले में अभी तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उनमें से एक तृणमूल कांग्रेस युवा शाखा के नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा शामिल हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि विनय मिश्रा कुछ समय पहले देश से बाहर चला गया और उसने संभवत: देश की नागरिकता भी त्याग दी है।
इसके अलावा इस मामले में निदेशालय ने बांकुड़ा थाने के पूर्व प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार मिश्रा को इस साल की शुरुआत में गिरफ्तार किया था। ईडी ने दावा किया था कि मिश्रा बंधुओं ने इस मामले में ‘कुछ प्रभावशाली लोगों के लिए और खुद के लिए 730 करोड़ रुपए की राशि’ प्राप्त की। इस मामले में अनुमानित 1,352 करोड़ रुपए की हेराफेरी थी। निदेशालय ने मामले में इस साल मई में आरोप पत्र दाखिल किया था।




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