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कुंभ में इस तरीके से करें स्नान, नहीं तो जाना होगा व्यर्थ

सोमवार,फ़रवरी 18, 2019
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भारत का प्रारंभिक इतिहास हिमालय से जुड़ा हुआ है। भारत के राज्य जम्मू और कश्मीर, सियाचिन, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, असम, अरुणाचल तक हिमालय का विस्तार है। इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान, उत्तरी अफगानिस्तान, तिब्बत, नेपाल और भूटान देश हिमालय के ही ...
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4 फरवरी 2019 को मौनी अमावस्या है। इस दिन सोमवार व श्रवण नक्ष‍त्र होने से महत्व और अधिक बढ़ गया है।
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हिरण्यगर्भ दान की तैयारी और व्यवस्था तुला पुरुष दान जैसी ही होती है। दान देने वाला मृदंग के आकार या सुनहले कमल के आकार का कुंड बनाता है।
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याग में माधव की प्रसन्नता के लिए, जाने-अनजाने पापों से छुटकारा पाने के लिए हर गृहस्थ को अपनी कमाई के अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करना चाहिए।
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कुंभ मेले का आयोजन चार नगरों में होता है:- हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन। चारों नगरों के आने वाले कुंभ की स्थिति विशेष होती है। एक ओर जहां नासिक और उज्जैन के कुंभ को आमतौर पर सिंहस्थ कहा जाता है तो अन्य नगरों में कुंभ, अर्धकुंभ और महाकुंभ का ...
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तीर्थराज प्रयाग मण्डल पांच योजन, बीस कोस तक फैला हुआ है। गंगा-यमुना और संगम के छह से ज्यादा तट हैं। इन्हीं को आधार बनाकर प्रयाग की तीन वेदियों को अति पवित्र माना गया है, ये हैं अंतर्वेदी, मध्यवेदी और बहिर्वेदी।
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प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है। इस सप्त‍पुरियों का पति कहा गया है जबकि उसके नजदीक काशी को उसकी सबसे प्रमुख पटरानी माना जाता है। पुराणों में कहा गया है कि अयोध्या, मथुरा, मायापुरी, काशी, कांची, अवंतिका (उज्जैन) और द्वारकापुरी, मोक्ष देने वाली हैं। ...
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महिलाएं तो सोलह लेकिन नागा बाबा सत्रह श्रृंगार करते हैं। वैसे माना जाता है कि महिलाएं अपने साज-श्रृंगार पर सबसे ज्यादा ध्यान देती हैं, लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी की नागा बाबा भी अपने श्रृंगार पर ध्यान देते हैं। हर नागा बाबा का श्रृंगार अलग ही ...
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प्रयागराज। कुंभ नगरी प्रयागराज में चल रहे अर्धकुंभ में वैसे तो संतों के पंडालों में सामान्य प्रसाद और खाने-पीने की ही चीजें मिलती हैं, लेकिन आपको यह जानकार आश्चर्य होगा की यहां पांडालों में महंगे से महंगे प्रसाद का वितरण भी होता है। यानी जितना महंगा ...
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प्रयागराज में गंगा के किनारे कुंभ के दिनों में स्नान करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रयागराज में कुंभ स्नान 15 जनवरी से 4 मार्च तक चलेगा। इसमें 15, 21 और 31 जनवरी, 4, 10, 16 और 19 फरवरी एवं 4 मार्च को मुख्य स्नान होगें। लेकिन देखा जाए तो 15 जनवरी से 4 ...
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हिन्दू धर्म के संन्यासियों में से एक नागा सन्यासी अपने पूरे शरीर पर भभूत धारण करते हैं। नागाओं में भी दिगंबर साधु ही शरीर पर भस्मी या भभूत लगाते हैं। यह भस्मी या भभूत ही उनका वस्त्र और श्रृंगार होता है। यह भभूत उन्हें बहुत सारी आपदाओं से बचाती है।
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आदि शंकराचार्य ने कुल चार मठ और चार शंकराचार्यों की नियुक्ति की थी, लेकिन वर्तमान में दो दर्जन से अधिक शंकराचार्य हो चले हैं। पिछले बार के प्रयागराज के कुंभ में इस संबंध बहुत विवाद हुआ था। इस बार भी यह मुद्दा चर्चा में है। असली और नकली शांकराचार्यों ...
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कल्पवास का अर्थ होता है संगम के तट पर निवास कर वेदाध्ययन और ध्यान करना। प्रयाग इलाहाबाद कुम्भ मेले में कल्पवास का अत्यधिक महत्व माना गया है। कल्पवास पौष माह के 11वें दिन से माघ माह के 12वें दिन तक रहता है। कुछ लोग माघ पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं।
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कुम्भ मेले में शैवपंथी नागा साधुओं को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ती है। नागा साधुओं की रहस्यमय जीवन शैली और दर्शन को जानने के लिए विदेशी श्रद्धालु ज्यादा उत्सुक रहते हैं। कुम्भ के सबसे पवित्र शाही स्नान में सबसे पहले स्नान का अधिकार इन्हें ही मिलता ...
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संसार के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव कुंभ में यदि आप जा रहे हैं तो आपके लिए कुछ जरूरी टिप्स और हिदायतें जिन पर अमल करके आप सुरक्षा और सुविधा में रहेंगे और तीर्थ लाभ ले सकेंगे। यदि आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो परेशानी में ही रहेंगे। आओ जानते हैं ...
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गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, गोदावरी, कृष्णा, सिंधु, क्षिप्रा, ब्रह्मपुत्र आदि सभी नदियों के अपने-अपने संगम है। हिंदू धर्म के तीन देवता हैं शिव, विष्णु और ब्रह्मा और तीन देवियां हैं पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती। इसीलिए सभी जगह त्रिवेणी का महत्व और ...
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कुंभ मेले के लिए वैसे तो शास्त्रों में बहुत सारे नियमों को बताया गया है, लेकिन लोग कुछ खास नियमों का पालन भी नहीं करते हैं तो उनका कुंभ में आना सिर्फ पर्यटन ही होता है। इसके अलावा कुछ ऐसी भी बातें हैं जो कुंभ में जाने से पहले जान लें। कुंभ में कुछ ...
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प्रयागराज (इलाहाबाद) में 15 जनवरी 2019 से शुरू होने वाले महाकुम्भ मेले में पहुंचने के लिए देश में सभी जगह से रेल, बस या एयर सुविधा उपलब्ध है। प्रयागराज महत्वपूर्ण धार्मिक और प्राशासनिक स्थल होने के कारण वायु, रेल और सड़क के माध्यम से भारत के सभी ...
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कुंभ में सभी लोग नहीं जा पाते हैं, लेकिन जाने का सोचते जरूर हैं। यह समय दान, जप, ध्यान और संयम का समय रहता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि कुंभ में जाए बगैर ही कैसे पुण्य लाभ कमाया जा सकता है?
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