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Last Updated : शनिवार, 16 दिसंबर 2023 (14:20 IST)

हाइड्रोग्राफिक सर्वे को लेकर भारत से क्‍यों पंगा ले रहा है मालदीव?

Maldives
पिछले कुछ समय से भारत और मालदीव के बीच तनातनी चल रही है। यह तब हुआ है जब से मालदीव में मोहम्मद मुइज्जू नए राष्‍ट्रपति बनकर आए हैं। बता दें कि इसके पहले मालदीव के राष्‍ट्रपति इब्राहिम सोलिह थे। लेकिन नए राष्‍ट्रपति के आने के बाद दोनों देशों के बीच खटपट और तल्‍खियां बढ़तीं जा रही हैं।

दरअसल, इस विवाद के केंद्र में जलक्षेत्र में किए गया हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण है, जिसे लेकर समझौता हुआ था, लेकिन नए राष्‍ट्रपति आते ही मालदीव ने यू-टर्न ले लिया है। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब राष्‍ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत के खिलाफ अपने तेवर दिखाए हैं, इसके पहले भी राष्‍ट्रपति बनते ही मुइज्‍जु ने भारत के खिलाफ ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाया था।

आइए जानते हैं क्‍या है हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और क्‍यों मालदीव अब इससे पीछे हट रहा है।

क्‍या है पूरा मामला : बता दें कि मालदीव सरकार ने भारत के साथ मालदीव ने अपने जलक्षेत्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वे कराने के लिए समझौता किया था। लेकिन अब मालदीव इससे पीछे हट गया है। उल्‍लेखनीय है कि इस समझौते पर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह के बीच साइन हुए थे। अब नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण कराने से इनकार कर दिया है। सर्वेक्षण से इनकार की खबरों के बाद भातर और मालदीव के बीच हो रहे घटनाक्रम एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं।

क्‍या चीन के इशारे पर हो रहा : बता दें कि सर्वेक्षण से पीछे हटने का तो मालदीव का यह पहला मामला है। लेकिन इसके पहले मुइज्जू ने मालदीव में तैनात भारतीय सैनिकों को वापस भेजने का फरमान भी सुना दिया था। माना जा रहा है कि मालदीव के राष्‍ट्रपति मुइज्जू यह सारी हरकतें चीन के इशारे पर कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर क्‍यों मुइज्जू सरकार भारत के खिलाफ काम कर रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि हो सकता है कि इसके पीछे चीन काम कर रहा हो, हो सकता है कि भारत से पंगा लेने के पीछे चीन की ताकत काम कर रही हो। बगैर किसी बैकअप के मालदीव भारत के खिलाफ इस तरह की गतिविधियों को अंजाम नहीं दे सकता।

चलाया था इंडिया आउटकैंपेन
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब राष्‍ट्रपति मुइज्जू ने भारत के खिलाफ अपने इरादे जाहिर किए हों। राष्‍ट्रपति मुइज्जू ने इसके पहले भी भारत के खिलाफ ‘इंडिया आउट’ कैंपेन चलाया था। जबकि इससे पहले मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के राष्ट्रपति सोलिह भारत के बड़े समर्थक थे। इस दौरान भारत-मालदीव के रिश्ते काफी अच्छे थे और सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन राष्‍ट्रपति मुइज्जू के आते ही दोनों देशों के बीच तल्‍खी नजर आने लगी है।

क्या है हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण समझौता?
हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण को जल सर्वेक्षण भी कहा जाता है। यह शिप के माध्यम से किया जाता है। इससे जल क्षेत्र की जुड़ी चीजों का अध्ययन करने में सफलता मिलती है। वाटर बॉडीज की विशेषताओं को समझने के लिए इसमें सोनार जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। इस सर्वेक्षण के जरिए पानी की गहराई, समुद्र तल और तट का आकार, संभावित अवरोध और जल निकायों की भौतिक विशेषताओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है। भारत-मालदीव के बीच समुद्र परिवहन के क्षेत्र में यह एक बड़ी डील साबित हो रही थी। इसके तहत अब तक तीन सालों में तीन सर्वेक्षण किए गए हैं। भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस दर्शक ने पहला संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण किया था।

1853 में हुआ था आखिरी सर्वे : अब तक 944 वर्ग किमी के क्षेत्र का सर्वेक्षण किया जा चुका था। खास बात यह है कि इनमें से कुछ क्षेत्रों का अंतिम सर्वेक्षण वर्ष 1853 में किया गया था। इस सर्वेक्षण से पर्यटन, मत्स्य पालन, कृषि आदि क्षेत्रों को मदद मिलने की उम्मीद बन रही थी, लेकिन मालदीव ने इस पर ब्रेक लगाने का फैसला लिया है। इससे पहले भारतीय जहाजों ने मालदीव, केन्या, मॉरीशस, मोजाम्बिक, ओमान, तंजानिया और श्रीलंका में सर्वेक्षण किया है।

क्यों मालदीव ने मारा यू-टर्न : रिपोर्ट बताती हैं कि नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को चीन का हितैषी बताया जाता है। उन्होंने अक्टूबर में चुनाव जीतने के बाद 5.21 लाख की आबादी वाले देश की सत्ता संभाली है। मुइज्जू ने इससे पहले अपने चुनाव में ‘इंडिया आउट’ कैंपेन चलाया था। इससे पहले मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के राष्ट्रपति सोलिह भारत के बड़े समर्थक रहे थे। इस दौरान भारत-मालदीव के रिश्ते काफी अच्छे थे। वैसे मालदीव परंपरागत रूप से भारत के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा रहा है।

चीन का शक्‍ति प्रदर्शन : चीन हिंद महासागर में आक्रामक रूप से शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि ये फैसला लेने से पहले मालदीव की नई सरकार भारतीय सेना के एहसानों को भूल गई। सेना ने इससे पहले मालदीव में काफी मदद की है। वह समुद्र में फंसे लोगों के लिए खोज और बचाव कार्यों में सहायता करने के लिए जानी जाती है। मालदीव के अनुसार इस तरह के सर्वेक्षण करने से संवेदनशील जानकारी को खतरा हो सकता है। अब देखना होगा कि मालदीव के इन फैसलों को भारत किस तरह से लेता है और क्‍या जवाब देता है।
Written & Edited By : Navin Rangiyal
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