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Last Updated :सोनीपत , गुरुवार, 22 जनवरी 2026 (16:12 IST)

शंकराचार्य विवाद के बीच गरजे CM योगी, किसे बताया कालनेमि, कौन था यह मायावी राक्षस?

UP Chief Minister Yogi Adityanath on Kalnemi
CM Yogi on Shankaracharya Congroversy : प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे। हमें उनसे सावधान रहना होगा। ALSO READ: Shankaracharya Avimukteshwaranand : धर्मनगरी प्रयागराज में गरमाई राजनीति, शंकराचार्य का आमरण अनशन और प्रशासन का नोटिस, क्या है पूरा मामला?
 
सीएम योगी ने सोनीपत में नाथ संप्रदाय के धार्मिक कार्यक्रम में कहा कि संत के लिए व्यक्तिगत संपत्ति कुछ नहीं होती। उसके लिए उसका धर्म ही संपत्ति होती है। उन्होंने कहा कि धर्म, राष्‍ट्र से बड़ा कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं है। उन्होंने धर्म को आचरण से साबित करने पर जोर दिया।
 
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। हालांकि मुख्‍यमंत्री योगी ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन उनके कालनेमि संबंधी बयान को इस विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। 

कौन था कालनेमि

कालनेमि का उल्लेख रामायण में मिलता है। कालनेमि रावण का विश्वस्त अनुचर था। वह एक मायावी राक्षस था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी। बाहर से वह धर्मात्मा और तपस्वी दिखाई देता था, लेकिन उसका उद्देश्य भगवान राम के कार्य में बाधा डालना था।

यह भयंकर मायावी और क्रूर था। इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक थी। रावण ने इसे एक बहुत ही कठिन कार्य सौंप दिया था। राम-रावण युद्ध में शक्ति लगने से लक्ष्मण बेहोश हो गए थे। तब हनुमान जी को संजीवनी लाने का कहा गया था। हनुमानजी जब द्रोणाचल की ओर चले तो रावण ने उनके मार्ग में विघ्न उपस्थित करने के लिए कालनेमि को भेजा।

कालनेमि ने अपनी माया से तालाब, मंदिर और सुंदर बगीचा बनाया और वह वहीं एक ऋषि का वेश धारण कर मार्ग में बैठ गया। हनुमानजी उस स्थान को देखकर वहां जलपान के लिए रुकने का मन बनाकर जैसे ही तालाब में उतरे तो तालाब में प्रवेश करते ही एक मगरी ने अकुलाकर उसी समय हनुमानजी का पैर पकड़ लिया। हनुमानजी ने उसे मार डाला। फिर उन्होंने अपनी पूंछ से कालनेमि को जकड़कर उसका वध कर दिया।
edited by : Nrapendra Gupta