हरिद्वार कुंभ : दिन में घाट सूने, शाम को गंगा आरती में उमड़ी भीड़

निष्ठा पांडे| पुनः संशोधित शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021 (23:46 IST)
हरिद्वार। (Coronavirus) के चलते हरिद्वार कुंभ में काफी ऐ‍हतियात बरती जा रही है। दूसरों राज्यों से आने वाले लोगों के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट लाना जरूरी कर दिया है। वहीं, लगातार चेकिंग भी की जा रही है।

हरिद्वार में दिन के समय कोरोना की चेकिंग के चलते गंगा घाट भले ही सूने दिखते हों, लेकिन दूसरी ओर शाम के समय गंगा आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं। सायंकालीन गंगा आरती में गंगा घाटों पर आकर्षक रोशनी भी की गई है।
धर्मध्वजा स्थापित : दूसरी ओर, महाकुंभ के दूसरे दिन शुक्रवार को बैरागी अखाड़ों के तीनों अणियों की धर्मध्वजा स्थापित हुईं। इसके बाद आज से बैरागी संतों के कुंभ को लेकर धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे।
कनखल स्थित बैरागी कैंप में तीनों बैरागी अखाड़ों की धर्मध्वजा स्थापित की गई। इस मौके पर सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों सहित कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत, आईजी कुंभ संजय गुंज्याल भी मौजूद रहे।
इस दौरान अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने कहा कि आज तीनों बैरागी अखाड़ा निर्वाणी, निर्मोही अणी और दिगंबर अखाड़े की धर्मध्वजा की स्थापना की गई है। जिसके साथ ही अखाड़ों में कुंभ की शुरुआत भी हो गई है। निर्मोही अखाड़ा के श्रीमहंत राजेंद्र दास ने बताया कि आज से धर्मध्वजा के नीचे ही सभी कार्य किए जाएंगे। विधिवत रूप से आज से ही निर्मोही अखाड़ा के कुंभ की शुरुआत हुई है।

दूसरी तरफ श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा निर्वाण, राजघाट, कनखल के धर्मध्वजा की स्थापना आज विधि विधान से हुई। धर्म ध्वजा का विधि-विधान से मोरपंख, रुद्राख की माला, तिलक, चंदन, रोली आदि से पूजा-अर्चना की गई तथा हर-हर महादेव के जयघोष और बैंडबाजों की धुन पर धर्म ध्वजा स्थापित की गई। धर्म ध्वजा स्थापित करने के दौरान हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्पवर्षा भी की गई।
श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा निर्वाण राजघाट, कनखल के महंत दामोदर दास, प्रेमदास व प्रमुख संतों ने इस अवसर पर शिरकत की। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि, अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास जी, श्री पंच दिगम्बर अणि अखाड़े के श्रीमहंत रामजी दास, श्री पंच निर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत कृष्णदास जी, बाबा हठयोगी, श्रीमहंत धर्मदास जी, श्रीमहंत मोहनदास जी आदि भी उपस्थित थे।



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