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Last Modified: नई दिल्ली , गुरुवार, 4 दिसंबर 2014 (18:54 IST)

सरकार बुजुर्गों के लिए सभी कार्यक्रमों को जारी रखेगी

बुजुर्ग
नई दिल्ली। वर्ष 2026 तक बुजुर्गों की आबादी 10.38 करोड़ से बढ़कर 17.32 करोड़ होने के अनुमान के बीच सरकार सामाजिक-आर्थिक और जन स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक उपयुक्त नीति का प्रारूप तैयार करने में जुटी है।
 
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने आज कहा, बुजुर्गों से जुड़े मुद्दे से निपटने के लिए हम हरसंभव प्रयास के प्रति प्रतिबद्ध हैं और बुजुर्गों के लिए देशभर में लागू कार्यक्रमों को मंत्रालय न केवल जारी रखेगा बल्कि उनके लिए पेंशन भी सुनिश्चित करेगा। 
 
उन्होंने कहा कि सरकार इन चुनौतियों से निपटने और आबादी में हो रहे बदलावों के प्रभावकारी लाभ का फायदा उठाने के लिए लोगों, उनके परिवारों और समाज को सक्षम बनाने के मकसद से उपयुक्त नीति, कार्ययोजना तथा उसके प्रभावकारी कार्यान्वयन का प्रारूप तैयार करने का निरंतर प्रयास कर रही है।
 
उन्होंने ‘बुजुर्ग : सम्मान, स्वास्थ्य और सुरक्षा’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ पर यह बातें कहीं। सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) जनसंख्या अनुसंधान केंद्र (पीआरसी) के साथ मिलकर कर रहा है।
 
मंत्री ने वहां उपस्थित सभी पक्षों को आश्वस्त किया कि सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय सम्मेलन की सभी सिफारिशों और सुझावों को लागू किया जाना सुनिश्चित करेगा। 
 
गहलोत ने वहां उपस्थित लोगों को इस बात से अवगत कराया कि इस वक्त 65 प्रतिशत जनसंख्या 40 वर्ष से कम आयु वाले लोगों की है और 20 साल बाद बुजुर्गों की जनसंख्या प्रतिशत में कई गुना इजाफा ही होगा। उन्होंने बताया, भारत में इस वक्त बुजुर्गों की संख्या 10.38 करोड़ है और इसके वर्ष 2026 तक 17.32 करोड़ होने की संभावना है। 
 
उन्होंने कहा, जिस तरह की विविध चुनौतियों का हम सामना कर रहे हैं उन पर समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए हम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायतीराज जैसे सामाजिक क्षेत्र से संबंधित सभी प्रमुख मंत्रालयों तथा जनसंख्या आयोग के साथ मजबूती से तालमेल बिठाएंगे। (भाषा)