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Last Updated : शनिवार, 3 जनवरी 2026 (14:21 IST)

इंदौर के दूषित पानी पर CAG ने 6 साल पहले दी थी चेतावनी, नींद में रही सरकार और 15 मौतें हो गईं

umang singhar on hanuman ji
इंदौर में दूषित पानी से हुआ कांड कोई हादसा नहीं, बल्‍कि सिस्‍टम की घोर लापरवाही है। यह आरोप नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्‍यप्रदेश और इंदौर प्रशासन पर लगाए हैं। उन्‍होंने कैग की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि दूषित पानी को लेकर 6 साल पहले ही कैग ने चेताया था लेकिन किसी ने नहीं सुनी और 15 मौतें हो गईं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर दूषित पानी कांड को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्‍होंने मध्‍यप्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भोपाल और इंदौर की जल आपूर्ति को लेकर कैग (CAG) ने 2019 की रिपोर्ट में ही गंदे पानी, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार गहरी नींद में सोती रही और अब 15 लोगों की जान चली गई। उमंग सिंघार के इस आरोप के बाद मध्यप्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था पर एक बार फिर से सवाल उठ रहे हैं।

बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत हो गई। 50 से ज्‍यादा लोग अस्‍पतालों में भर्ती हैं। यह नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में कांग्रेस मंत्री विजयवर्गीय की कार्यशैली पर भी सवाल उठा रही है। हालांकि लगातार हंमागे के बीच शुक्रवार को नगर निगम आयुक्‍त और अपर आयुक्‍त को हटा दिया गया है। इस पूरे कांड को लेकर इंदौर में हंगामा मचा हुआ है। साथ ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पत्रकार को दिए बयान में ‘घंटा’ शब्‍द के इस्‍तेमाल को लेकर भी बवाल मचा हुआ है। बता दें कि शुक्रवार को कांग्रेस ने इस मामले को लेकर प्रदर्शन भी किया था।
सिंघार का सरकार पर हमला, क्‍या कहा : उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर और भोपाल में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने 2019 में ही गंभीर चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने न तो रिपोर्ट को गंभीरता से लिया और न ही सुधार किए। उमंग सिंघार ने ट्वीट कर कहा कि गंदे पानी की वजह से आम लोगों की मौतें हो जाना कोई हादसा नहीं, बल्‍कि सरकारी सिस्‍टम की लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीता है।

ADB से कर्ज लिया था, फिर साफ पानी क्‍यों नहीं: नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने इसके बाद कहा कि मध्यप्रदेश
सरकार ने साल 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के जल प्रबंधन के लिए 200 मिलियन डॉलर (तब करीब 906 करोड़ रुपए) का कर्ज लिया था। इस प्रोजेक्ट का मकसद था कि हर आम नागरिक को  पर्याप्त और साफ पानी मिल सके। लेकिन कर्ज लेने के करीब 15 साल बाद 2019 में आई CAG रिपोर्ट ने इस पूरे प्रोजेक्ट को असफल और भ्रष्टाचार से ग्रस्त बताया।

क्‍या है कैग (CAG) की रिपोर्ट: नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि CAG की रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में केवल 4 जोन और भोपाल में सिर्फ 5 जोन में रोज पानी की सप्लाई हो रही थी। दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से महज 5.30 लाख को ही नल कनेक्शन मिल सके। इपलाइन लीकेज की शिकायतों पर नगर निगम 22 से 182 दिन तक लगाता रहा। 2013 से 2018 के बीच लिए गए 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए, लेकिन इन पर की गई कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। बता दें कि CAG की जांच में 54 में से 10 पानी के नमूने दूषित पाए गए, जिनमें गंदगी और मल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मौजूद था। इसके चलते भोपाल के 3.62 लाख और इंदौर के 5.33 लाख कुल 8.95 लाख लोगों को गंदा पानी सप्लाई हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि गैर-राजस्व पानी (Non-Revenue Water) 30 से 70 प्रतिशत तक है, यानी इतना पानी कहां जा रहा है यह किसी को पता नहीं।

CAG रिपोर्ट ने भोपाल और इंदौर के पानी प्रबंधन पर सवाल:
  • इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में सिर्फ पांच जोनों में रोजाना पानी पहुंचता है।
  • दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से सिर्फ 5.30 लाख को नल कनेक्शन मिले हैं।
  • रिसाव रोकने कि शिकायत पर नगर निगम 22 से 182 दिन लगाता हैं।
  • 2013 से 2018 के बीच 4,481 पानी के नमूने (भौतिक, रासायनिक और जीवाणु परीक्षण वाले) पीने लायक नहीं पाए गए। रिकॉर्ड से पता नहीं चला कि नगर निगम ने क्या कार्रवाई की।
  • स्वतंत्र जांच में 54 नमूनों में से 10 खराब पाए गए—उन्हें गंदगी और मल कोलिफॉर्म था। इससे भोपाल के 3.62 लाख और इंदौर के 5.33 लाख यानी कुल 8.95 लाख लोगों को गंदा पानी मिला।
  • स्वास्थ्य विभाग ने इस दौरान 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले बताए।
  • गैर-राजस्व पानी 30 से 70 प्रतिशत तक है। कोई नहीं जानता कि यह पानी कहां जा रहा है। पानी का नियमित ऑडिट न होने पर बर्बादी कैसे पता चलेगी?
  • पानी का टैरिफ कि वसूली नहीं हो रही। दोनों शहरों में ₹470 करोड़ के बकाया हैं।
  • भोपाल में 9-20 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (LPCD) और इंदौर में 36-62 LPCD पानी मिल रहा है।
  • ओवरहेड टैंक नियमित साफ नहीं किए जा रहे।
Edited By: Navin Rangiyal
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