'हमारा लक्ष्य विश्व का भारतीयकरण'

Sadhvi Ritambhara
NDNAIDUNIA
को ‍िमयामी (फ्लोरिडा ) से इंग्लैंड के लिए प्रस्थान किया। अमेरिका के लॉस एंजिल्स, ह्यूस्टन, कैलिफोर्निया, अटलांटा, फोर्ट लॉडरडेल शहरों में भागवत और रामकथाओं के अलावा ऋतुंभराजी के प्रवचन भी हुए। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में भारतीय परिवारों ने अपने बच्चों व बुजुर्गों सहित भाग लिया।

इंग्लैंड के लिए प्रस्थान से पहले ऋतंभराजी ने इस प्रतिनिधि से हुई भेंट में बताया कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के मूल तत्व वसुधैव कुटुम्बकम के विचार को फैलाना है ताकि सारी दुनिया भारतीय संस्कृति के इस महत्व को समझे और आत्मसात करे।

उन्होंने बताया कि हम भारत के वैश्वीकरण से भयभीत नहीं हैं बल्कि हमारा लक्ष्य तो विश्व का भारतीयकरण करना है। भारतीय संस्कृति सारे संसार को अपना बनाने और उसे एक संयुक्त परिवार का रूप देखने की दृष्टि रखती है यही दृष्टि हम दुनिया को देना चाहते हैं। हम केवल अपने लिए नहीं जीते, हम तो चींटी के प्राणों की रक्षा की भी प्रेरणा देते हैं। मनुष्य के साथ सभी जीवों और वनस्पतियों को भी हम अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।

ऋतम्भराजी ने बताया कि विदेशों में बसे भारतीय परिवार भी चाहते हैं कि उनके बच्चों को वे अपनी मातृभाषा, संस्कृति और संस्कारों से सींचे। उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों से कहा है कि भौतिकवाद के इस दौर में भारत का वैश्वीकरण व्यापारिक उद्देश्यों से भले ही हो रहा हो लेकिन हम यह न भूलें कि हमारी सम्पत्ति डॉलर नहीं हमारे बच्चे और हमारे संस्कार हैं। हम अपनी नई पीढ़ी को इन संस्कारों से सींचे तभी भारत का गौरव बढ़ेगा। सारे संसार को प्रेम और अपनत्व का संस्कार भारतीय संस्कृति ही दे सकती है।

वृंदावन के वात्सल्यग्राम को सहायता
ऋतुंभराजी ने बताया कि वृंदावन में निराश्रित बच्चों व अभावग्रस्त महिलाओं के लिए स्थापित वात्सल्यग्राम एक अनूठा प्रकल्प है। यहाँ ऐसे कई बच्चों को घर मिला है, जिन्हें पैदा होते ही कचरे के ढेर में पटक दिया गया था जिन्हें हमारा समाज अवैध संतान कहता है।

उन्होंने कहा कि संबंध अवैध हो सकते हैं मगर संतान को अवैध कहना उन बच्चों का अपमान है। अतः हमने इन बच्चों को वात्सल्यग्राम में घर दिया। उन्हें दादी, नानी, माँ और मौसी दी। हमारे वात्सल्यग्राम प्रकल्प में स्कूल, स्वावलंबन हेतु प्रशिक्षण केंद्र और अस्पताल भी है।

फ्लोरिडा| अनिल त्रिवेदी| Last Updated: बुधवार, 1 अक्टूबर 2014 (14:41 IST)
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अमेरिका में अध्ययनरत भारतीय मूल के कई विद्यार्थियों ने कुछ माह वात्सल्यग्राम में सेवाएँ देने का संकल्प भी लिया है। उनकी स्कूली शिक्षा में सामुदायिक सेवा अनिवार्य होती है। अतः वे अपने ही देश में सेवा करेंगे। रजनी शाह, विजय नारंग, हर्ष दवे तथा इला बहन ने बताया कि भारतीय परिवारों ने भी वात्सल्यग्राम प्रकल्प के लिए अमेरिका में स्थापित परमशक्तिपीठ के माध्यम से आर्थिक सहयोग प्रदान किया है।



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