मुद्रास्फीति पर चिंता बरकरार-आरबीआई

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 20 सितम्बर 2013 (17:45 IST)
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नई दिल्ली। ने शुक्रवार को कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति को लेकर चिंता बरकरार है और अभी इसको लेकर ढील नहीं दी जा सकती


आरबीआई ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की अपनी पहली मध्य तिमाही समीक्षा में कहा कि मौजूदा आकलन है कि उचित नीतिगत प्रावधान के अभाव में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस साल की शेष अवधि के लिए अनुमानित स्तर से ऊंची रहेगी। खुदरा मुद्रास्फीति पिछले महीने 9.52 प्रतिशत थी।
थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 6.1 प्रतिशत पर रही। यह 6 महीने का उच्चतम स्तर है। आरबीआई केवल 4-5 प्रतिशत की मुद्रास्फीति को आरामदेह मानता है।


आरबीआई ने मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर रेपो को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। रेपो वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को फौरी उधार की सुविधा देता है, जो अमूमन एकाध दिन के लिए होती है।

राजन ने कहा कि मुद्रास्फीति को ज्यादा सहनीय स्तर पर लाने के लिए रेपो दर में तुरंत प्रभाव से 25 आधार अंक बढ़ाने की जरूरत है। (भाषा)



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