गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026
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Written By WD

कविता: होली का त्यौहार

poem
नीतू कौशल
 
अबीर गुलाल की धूम मची है
पिचकारी की उड़े फुहार
रंग बिरंगी खुशियां लाया
होली का त्यौहार
 
बच्चे-बूढ़े और युवा
एक दूजे को रंग लगाते
बैर पुराने भूल-भाल 
दुश्मन भी गले लग जाते
 
रंगों की बौछार में 
धुल जाती है हर तकरार
रंग बिरंगी खुशियां लाया
होली का त्यौहार
 
कहीं भांग का रंग जमा है
कहीं तरंग ठंडाई की
मुंह में पानी ले आती है
खुशबू गुझिया और मिठाई की
 
शरबत और पकवानों से
होता मेहमानों का सत्कार
रंग बिरंगी खुशियां लाया
होली का त्यौहार
 
रंगों का यह पर्व हमें
मिलजुल कर जीना सिखलाता है
प्रेम के फूलों से हम सबके
मन आंगन को महकाता है
 
वीराने जीवन में लेकर 
आता है खुशियों की बहार 
रंग बिरंगी खुशियां लाया 
होली का त्यौहार