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Written By WD

सोंधी सच्ची आँच हूँ

अनुप्रिया
अनुप्रिया
NDND
ना मैं
इन्द्रधनुष की सतरंगी डोर
जिससे बँधे हैं
जिन्दगी के सारे रंग,
ना मैं
नीले आकाश का विस्तार
जिसकी बाँहों में
खिलते चाँद-सितारे
ना मैं
पंखों की ऊँची उड़ान
कि छू सकूँ
बादलों की गहरी बेचैनियाँ
पर हाँ
अनचाही ही सही
तुम्हारे भीतर उग आई
सोंधी सच्ची आँच हूँ
दिपदिप जलने को प्रतिबद्ध।
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WD