मैं क्या चाहता हूँ
एक बच्चे की व्यथा
पल्लवी त्रिवेदी आज मुझे अदालत में फैसला करना है मम्मी या पापा, किसके साथ रहना है पापा के खिलौने या मम्मी की लोरी दोनों में से किसी एक को चुनना है मुझ पर क्या बीत रही कोई न सोचे मेरी तकलीफों से किसी को क्या करना है मम्मी-पापा दोनों ने ही वादा ले लिया है अब मुझको किसी एक के वादे से मुकरना है दोनों के बिना ही मैं जी नहीं सकता कैसे कहूँ किसकी उँगली को पकड़ना है न जाने क्यों ऐसा मेरे साथ ही हुआ घर पे जाके आज तो भगवान से लड़ना है चाहे कोई जीते या चाहे कोई हारे सजा तो हर हाल में बस मुझको भुगतना है कोई भी मुझसे ये क्यों पूछता नहीं मेरी क्या मर्जी है मेरी क्या तमन्ना है चाहे कुछ बोलूँ या खामोश रहूँ मैं हर हाल में मुझको दो हिस्सों में बँटना है। (
लेखिका भोपाल में उपपुलिस अधीक्षक रेल के रूप में पदस्थ हैं)