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माँ बूढ़ी हो गई
त्रिलोक महावर माँ कमर झुक गईमाँ बूढ़ी हो गईप्यार वैसा ही हैयाद हैकैसे रोया बचपन में सुबक-सुबककर माँ ने पोंछे आँसू खुरदरी हथेलियों से कहानी सुनाते-सुनाते चुपड़ा ढेर सारा प्यार गालों परसुबह-सुबह रोटी पर रखा ताज़ा मक्खनरात में सुनाईसोने के लिए लोरियाँइस उम्र में भीथकी नहीं माँ तो माँ है।साभार : संबोधन