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दुख ही सुख का सपना
जो आदमी अपने समूचे जीवन मेंकभी भी, किसी भी कारण से हुआ नहीं दुखी वह, सुखी कैसे हो सकता है? सचमुच सच्चे सुख का तो मज़ा ही तब है जबकि चखा हो स्वाद दुख कादुख नहीं तो सुख नहींदुख ही सुख का सपनादुख ही सुख-निशान पानीदुख ही में छुपा है कोमलकांत सुखजो आदमीअपने समूचे जीवन मेंकभी भी, किसी भी कारण सेहुआ नहीं दुखीजिसने देखा नहीं दुख कभीवह कैसे परखेगा पाएगा सुख अभी?सुख पाना है तो दुख माँगोमोनालिसा की मुस्कुराहट पर मत जाओशोध करो कँटीले शोध लेकर चुनौतियाँ अपारएक छोटी-सी कोशिश भीलौटा सकती है वह अकड़, वह जकड़जो हो जाएराजाओं-महाराजाओं की इतराहट विरुद्धऔर बनकर बड़ी चुनौती भी ।