शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026
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Written By ND

तो रोना आता है...

साहित्य
- अरुंधती आमड़ेक

ND
आँसू कमजोरी की नि‍शानी है ये माना मगर
गम जब हद से गुजरने लगे तो रोना आता है

अँधेरों से लड़ने की ताकत है मुझमें मगर
दि‍न जब रात से लंबा लगे तो रोना आता है

हर दरि‍या तैर कर नि‍कल जाएँगे ये गुरूर अच्‍छा है मगर
जि‍स्‍म जब रूह से हारने लगे तो रोना आता है

अपनी कि‍स्‍मत पर इठलाना अच्‍छा लगता है मगर
दि‍माग जब दि‍ल से हारने लगे तो रोना आता है

यादों की दस्‍तक से कौन खुद को बचा पाया है मगर
कभी फलक सि‍तारों से खाली लगे तो रोना आता है

मेरे दोस्‍तों का जि‍गर बहुत बड़ा है मगर
खुद से माफी न मि‍ले तो रोना आता है

इस दुनि‍या में हाथ मि‍लाने वाले बहुत हैं
कि‍सी से दि‍ल ना मि‍ले तो रोना आता है...