तेरे जाने के बाद मैं रहा जीवित मेरे जाने के बाद गीत रह जाएगा मैं नहीं कह सका था जो, वह कह जाएगा।
उछलेगी कोई गीत-लहर, संगीत-लहर चीत्कारों-हाहाकारों के अंदर से ही किलकारी भर जन्मेगा शिशु-सा एक शहर विध्वंसों के अनजान किसी शहर से ही उससे पहले संभवत: मेरे सम्मुख मेरे सपनों का राजमहल ढह जाएगा अवशेष धरोहर का अंचल लहराएगा।
हर यादगार टूटन में तेरी छवि होगी तेरे दु:ख में होगा मेरी रचना का क्षण तू एक अशांत नदी-सी बहती जाएगी तूफानों में होगा मेरा प्रत्यावर्तन निश्चित अप्रतिहत तेज समय-धारा में असमर्थ व्यर्थ कूड़ा करकट बह जाएगा अँजुरी में पावन गंगाजल रह जाएगा।