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चल घूमें और कहीं!
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तारादत्त 'निर्विरोध' अपने किसी अकेलेपन कीकोई जगह नहीं,चल घूमें और कहीं।कच्ची सड़कों पर चलने सेअच्छा उड़ते रहना,जीवन का सीधा मतलब हैखुद से लड़ते रहना!कटुताएँ मिल रही निरंतरकोई वजह नहीं।कुंठाओं की इस बस्ती मेंसभी लोग चितकबरे,आँखदार भी दृष्टिहीन हैं,कानों वाले बहरे।अँधी दौड़, पाँव के नीचेकोई सतह नहीं।काले चश्मों की दुनिया मेंकौन किसे पहचाने?वेतन एक निमिष का सुख है,दुख अनाज के दाने।चारों ओर धुँध के डेरे,होती सुबह नहीं। चल घूमें और कहीं।