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Written By WD

गीत का कंठ साँवला होगा

साहित्य
डॉ. शिव ओम 'अंबर'
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अग्नि के गर्भ में पला होगा,

शब्द जो श्लोक में ढला होगा।

दृग मिले कालिदास के उसको,

अश्रु उसका शकुंतला होगा।

दर्प ही दर्प हो गया है वो,

दर्पणों ने उसे छला होगा।

भाल कर्पूरगौर हो बेशक,

गीत का कंठ साँवला होगा।

साभार : कथाबिंब
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