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उजियारा उपहार है, उजियारा वरदान

उजियारे के दोहे

उजियारा
डॉ. शरद नारायण खरे
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अंधकार को जीतकर, हासिल कर आलोक।
जिसके संग उजियार है, बस उसका है लोक॥

सभी ओर है रोशनी, पर मन में अंधयार।
तो सब कुछ ही व्यर्थ है, कोई भी ना सार॥

उजियारा गुणधर्म है, उजियारा है तत्व।
उजियारे से ही खिले, सदा मनुज-व्यक्तित्व॥

उजियारे से मान है, उजियारे से नाम।
उजियारे से हृदय में, बसते सीता-राम॥

उजियारा संकल्प है, उजियारा उत्साह।
उजियारे से दोस्तों, हमको मिलती राह॥

उजियारा भ्रातृत्व है, उजियारा है प्यार।
उजियारे से ऐ 'प्रिये', जगमग हो संसार॥

उजियारा करता भला, देता नवल विचार।
उजियारे से ही तो बनता सद् आचार॥

उजियारा उत्थान है, उजियारा सुख-खान।
उजियारा उपहार है, उजियारा वरदान॥

उजियारा प्रणम्य है, उसकी जय-जयकार।
उजियारे से जिंदगी, पाती है आकार॥
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