कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

23 जुलाई 2010 को पूनम राय ने एक ट्विटर के माध्यम से अमिताभ से यह सवाल किया कि क्या यह रचना आपके पिताजी ने लिखी है या निरालाजी ने?
उसी दिन ने इस प्रश्न के उत्तर में ट्विट किया, ' बाबूजी ने लिखी है।' >
> अमिताभ ने इसे स्वयं पढ़ा भी है तो और अधिक लोग मानते हैं कि यह हरिवंशराय बच्चन की रचना है।
इधर अभी भी कई लोग यह खोजते रहे कि यह रचना किसकी है?

अमिताभ बच्चन को हमने 3 दिसंबर 2015 को ट्विटर के माध्यम से यह जानकारी मांगी - 'क्या 'कोशिश करने वालों की....' कविता का मूल स्रोत बता सकते हैं? यह निरालाजी व सोहनलाल द्विवेदी की भी कही जा रही है।' 


 

अमिताभ बच्चन ने  उसी  दिन  एक ट्विट जारी किया:


एक बात आज स्पष्ट हो गई
ये जो कविता है -
'कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती'
ये कविता बाबूजी की लिखित नहीं है
इस के रचयिता हैं
सोहन लाल द्विवेदी ....
कृपया इस कविता को बाबूजी, डॉ. के नाम पे न दें ... ये उन्होंने नहीं लिखी है..' 
अमिताभ ने यही अपील फेसबुक पर भी की।

हमने देवमणि पाण्डेय (जिन्होंने 22 फरवरी 2010 को अपने ब्लॉगपर इसकी चर्चा की थी) को 3 दिसंबर को एक ई-मेल किया जिसमें हमने यह चर्चा की, 'सोहन लाल द्विवेदी की शैली से यह रचना अवश्य मेल खाती है। मैं आपसे पूछना चाहता था कि क्या डॉ रामजी तिवारी ने स्वयं आपसे यह बात बताई थी या यह किसी समाचार में प्रकाशित हुई थी कि यह द्विवेदी जी की रचना है।
 
यह रचना इस समय महाराष्ट्र के 6वी कक्षा के पाठ्यक्रम में बिना रचनाकार के नाम के प्रकाशित है। कृपया अटैच्ड पीडीएफ (हमने उन्हें इसकी पीडिएफ कॉपी भी भेजी) देखें। यदि डॉ. तिवारी ने यह आपको 2010 में बताया था तो बिना नाम के क्यों प्रकाशित है? संभव है साक्ष्य के अभाव या किसी अन्य कारणों से नाम हटा दिया गया हो?'
 
रचना का मूल स्रोत तो नहीं पता चल पाया लेकिन अमिताभ बच्चन ने यह स्पष्टीकरण अवश्य दे दिया कि यह रचना उनके बाबूजी की न होकर सोहनलालद्विवेदी की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे इस रचना को उनके बाबूजी के नाम से न दें।
 
एक ईमानदार प्रयास का परिणाम निकला - रचनाकार को न्याय मिला है। इतने बरसों बाद अब यह विवाद विराम ले रहा है।  रचनाकार के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कृपया यह रचना अब सोहनलाल द्विवेदी की रचना के रूप में प्रकाशित करें।




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