क्या कहते हो भाई, दुनिया के सारे नेता पढ़े-लिखे ढोर हैं। ऐसा तुम्हें कैसे यकीन हुआ, कब हुआ। थोड़ा हम भी तो सुनें!
अरे बाबा! सही तो कह रहा हूँ। देखो भारत की पूरी आबादी में पढ़े-लिखे लोगों की कमी नहीं है फिर भी हर बार की तरह इस बार भी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद सारे पढ़े-लिखे लोग अनपढ़ों की तरह उन्हें ही जिताएँगे जिन्होंने महँगाई बढ़ाकर जनता पर इतना बड़ा उपकार किया है।
मजदूर को दो जून की रोटी तक नसीब नहीं हो रही है। चारों तरफ महँगाई, आतंकवाद का हाहाकार मचा हुआ है और लूटपाट की वारदातें सौ फीसदी बढ़ गई हैं।
फिर भी अनपढ़ यानी पढ़ी-लिखी जनता देश के पढ़े-लिखे ढोर नेताओं को अपना वोट देकर गौरवान्वित करेगी और पढ़े-लिखे ढोर नेता फिर से जनता को उल्लू बनाकर उनके माथे ही ठीकरा फोड़ेंगे क्योंकि आखिर अपने कीमती वोट देकर उन्होंने ही तो नेता को जिताया है, उसका खामियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा ना।