जगदीश्वर मृत्युलोक में आए तो थे थोड़े दिनों के लिए लेकिन अब जाने का मन नहीं कर रहा है। टीवी, इंटरनेट से ऐसे चिपकते कि दिन क्या और रात क्या! मोबाइल और छोटा-सा संगीत सुनाने वाला एमपी-3 गले में ही लटका रहता है।
देवी दिन में दसियों बार खीझतीं, किटकिट करतीं लेकिन चस्का तो चस्का।
एक दिन जगदीश्वर भी चिढ़ गए- ये तुम्हारा कैसा व्यवहार होता जा रहा है देवी!! कामवाली बाई से तो तुम बड़े प्रेम से बात करती हो और मुझसे...?
देवी बोलीं- तुम पति हो...... और वो कामवाली है........ कभी भी छोड़ कर जा सकती है।