इस बार जया अजा एकादशी कब है, जानिए कथा, मुहूर्त और महत्व

Jaya Ekadashi 2022
 
इस बार जया (अजा) एकादशी व्रत (date 2022) भाद्रपद कृष्ण एकादशी के दिन यानी 23 अगस्त 2022, मंगलवार के दिन रखा जाएगा तथा भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है, वह 7 सितंबर 2022 को रखी जाएगी। यहां पढ़ें जया से संबधित जानकारी-

जया अजा एकादशी के शुभ मुहूर्त- Jaya ekadashi muhurat 2022

जया अजा एकादशी व्रत- दिन मंगलवार, 23 अगस्त 2022 को
एकादशी तिथि का प्रारंभ- 22 अगस्त 2022 को 03.35 ए एम से।
एकादशी तिथि का समापन 23 अगस्त, 2022 को 06.06 ए एम पर।
पारण टाइम- अत: एकादशी का उपवास रखने वालों को व्रत तोड़ने का सही समय- 24 अगस्त को 05.55 ए एम से 08.30 ए एम तक।
द्वादशी तिथि का समापन समय- 08:30 ए एम पर।

जया अजा एकादशी व्रत कथा- Jaya aja ekadashi katha

भाद्रपद कृष्ण एकादशी की कथा के अनुसार प्राचीन काल में हरिशचंद्र नामक एक चक्रवर्ती राजा राज्य करता था। उसने किसी कर्म के वशीभूत होकर अपना सारा राज्य व धन त्याग दिया, साथ ही अपनी स्त्री, पुत्र तथा स्वयं को बेच दिया। वह राजा चांडाल का दास बनकर सत्य को धारण करता हुआ मृतकों का वस्त्र ग्रहण करता रहा। मगर किसी प्रकार से सत्य से विचलित नहीं हुआ।

कई बार राजा चिंता के समुद्र में डूबकर अपने मन में विचार करने लगता कि मैं कहां जाऊं, क्या करूं, जिससे मेरा उद्धार हो? इस प्रकार राजा को कई वर्ष बीत गए। एक दिन राजा इसी चिंता में बैठा हुआ था कि गौतम ऋषि आ गए। राजा ने उन्हें देखकर प्रणाम किया और अपनी सारी दु:खभरी कहानी कह सुनाई।

यह बात सुनकर गौतम ऋषि कहने लगे कि, 'हे राजन तुम्हारे भाग्य से आज से सात दिन बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा नाम की एकादशी आएगी, तुम विधिपूर्वक उसका व्रत करो। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से तुम्हारे समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे।' इस प्रकार राजा से कहकर गौतम ऋषि उसी समय अंतर्ध्यान हो गए।

राजा ने उनके कथनानुसार एकादशी आने पर विधिपूर्वक व्रत व जागरण किया। उस व्रत के प्रभाव से राजा के समस्त पाप नष्ट हो गए। स्वर्ग से बाजे बजने लगे और पुष्पों की वर्षा होने लगी। उसने अपने मृतक पुत्र को जीवित और अपनी स्त्री को वस्त्र तथा आभूषणों से युक्त देखा। व्रत के प्रभाव से राजा को पुन: राज्य मिल गया। अंत में वह अपने परिवार सहित स्वर्ग को गया। यह सब अजा एकादशी के प्रभाव से ही हुआ।

अत: जो मनुष्य यत्न के साथ विधिपूर्वक इस व्रत को करते हुए रात्रि जागरण करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट होकर अंत में वे स्वर्गलोक को प्राप्त होते हैं। इस एकादशी की कथा सुनने मात्र से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। ऐसी एकादशी का व्रत करने वाले व्रतधारियों को कई शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

एकादशी का महत्व- Jaya ekadashi importance

हिन्दू धर्म में वर्षभर में आने वाली 24 एकादशी तिथियों का विशेष महत्व माना गया है। यह एकादशी मोक्ष देने तथा समस्त पापों का नाश करने वाली मानी जाती है, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की यह एकादशी अजा एकादशी के नाम से जनमानस में प्रचलित है। यह एकादशी व्रत करने वालों को सूर्योदय से पूर्व जागकर स्नानादि से निवृत्त होकर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करना चाहिए। फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के पश्चात ही श्रीहरि नारायण विष्णु और माता लक्ष्मी देवी का पूजन करना चाहिए।

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली तथा अश्वमेध यज्ञ का फल देने वाली मानी गई है। इस दिन विधि-विधान पूजन के पश्चात एकादशी व्रत की कथा अवश्य ही पढ़नी अथवा सुननी चाहिए।

इस दिन निराहार व्रत रखने के पश्चात सायं को फलाहार करके अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन तथा दक्षिणा देने बाद ही स्वयं को भोजन करना चाहिए। धार्मिक मान्यतानुसार इस एकादशी का व्रत-उपवास तथा पूरे मनोभाव से पूजन करने वाला व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में विष्णु लोक को जाता है। ऐसा इस एकादशी का खास महत्व है।





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