पहली जीत का स्वाद...
टी-20 विश्व चैपियन
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राज्य सरकारें भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। हरियाणा सरकार ने जोगिन्दर शर्मा को 23 लाख, टीम की मुख्य प्रायोजक कंपनी सहारा इंडिया टीम ने हरेक सदस्य को 25 लाख रुपए का एक घर इनाम के रूप में देने की घोषणा की है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गौतम गंभीर और वीरेन्द्र सहवाग को पाँच-पाँच लाख रुपए देने की घोषणा की। रॉबिन उथप्पा और श्रीसंथ को भी उनके राज्यों की सरकारें 5-5 लाख रुपए देंगी।
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मगर हमें थोड़ा मुड़कर देखने की जरूरत है। 23 मार्च 2007 को आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप के पहले दौर में भारत श्रीलंका के विरुद्ध 69 रनों से हार कर बाहर हो गया था। इसके बाद तो मानो भारत में क्रिकेट खिलाड़ियों पर आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा जिन खिलाड़ियो को आज इतनी इज्जत बख्शी जा रही है, जिनका विजय जूलूस निकाला जा रहा है उनमें से कई खिलाड़ियों को अपने ही देश में रात के अँधेरे में कड़ी सुरक्षा में मुँह छिपाकर लौटना पड़ा था। राँची के जो लोग आज टी-20 के हीरो महेन्द्रसिंह धोनी के गुण गाते नहीं थक रहे हैं उनमें से ही कुछ लोगों ने उस समय धोनी के निर्माणाधीन मकान पर तोड़-फोड़ कर अपना गुस्सा दर्ज कराया था।
कुल मिलाकर कहें तो भारत की जनता का मन भोले-शंभु जैसा है, जो जितनी जल्दी क्रोधित हो जाते हैं, उतनी ही जल्दी खुश भी हो जाते है। इन सब बातों का मतलब यह भी है की इस बार भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को थोड़ा धैर्य रखने की आवश्यकता है। अगर आपको याद हो तो 1983 की विजेता टीम को वर्ल्ड कप जीतने के बाद वेस्टइंडीज से वनडे सिरीज में 0-5 व टेस्ट सिरीज में 0-3 से करारी हार का सामना करना पड़ा था।
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आगामी वनडे सिरीज के लिए इस विश्व विजेता टीम में से कुछ चैंपियन खिलाड़ियों को बाहर जाना होगा। क्योंकि सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और जहीर खान के लिए जगह कौन खाली करता है, यह बहस का मुद्दा रहेगा।
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भारतीय टीम की जीत की तुलना चंद्रमा पर पहुँचने वाले पहले यात्री नील आर्मस्ट्रांग से की जा सकती है। क्योंकि टीम इंडिया ने भी ट्वेंटी-20 विश्व कप में सबसे पहले तिरंगा लहराया है। विजेता तो आने वाले समय में कई और भी होंगे पर पहली जीत का स्वाद अलग ही होता है। तो आज मौका है खुशियाँ मनाने का...

