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Written By संदीपसिंह सिसोदिया

पहली जीत का स्वाद...

टी-20 विश्व चैपियन

महेन्द्रसिंह धोनी जोगिन्दर शर्मा वीरेन्द्र सहवाग रोहित शर्मा आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप भारत ट्वेंटी-20 विश्वकप
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महेन्द्रसिंह धोनी की टीम ने जिस तरह से 100 करोड़ उम्मीदों को परवान चढ़ाया उसे देख हर हिन्दुस्तानी का दिल खुशी से झूम उठा। हर कोई इस टीम को कुछ न कुछ देना चाहता है। बीसीसीआई ने जहाँ अपने खजाने का मुँह इनके लिए खोल दिया है, वहीं एयर इंडिया ने अपने यहाँ कार्यरत 6 खिलाडियों को आउट ऑफ टर्न पदोन्नति व टीम के सभी खिलाड़ियों को पाँच साल तक मुफ्त हवाई यात्रा की भी पेशकश की है।

राज्य सरकारें भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। हरियाणा सरकार ने जोगिन्दर शर्मा को 23 लाख, टीम की मुख्य प्रायोजक कंपनी सहारा इंडिया टीम ने हरेक सदस्य को 25 लाख रुपए का एक घर इनाम के रूप में देने की घोषणा की है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गौतम गंभीर और वीरेन्द्र सहवाग को पाँच-पाँच लाख रुपए देने की घोषणा की। रॉबिन उथप्पा और श्रीसंथ को भी उनके राज्यों की सरकारें 5-5 लाख रुपए देंगी।

भारत की जनता का मन भोले-शंभु जैसा है, जो जितनी जल्दी क्रोधित हो जाते हैं, उतनी ही जल्दी खुश भी हो जाते है। इन सब बातों का मतलब यह भी है की इस बार भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को थोड़ा धैर्य रखने की आवश्यकता है।
इसी तरह महाराष्ट्र सरकार ने रोहित शर्मा और अजीत आगरकर को 10-10 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। और लगता है कि इनामों की यह बरसात काफी दिनों तक जारी रहने वाली है।

मगर हमें थोड़ा मुड़कर देखने की जरूरत है। 23 मार्च 2007 को आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप के पहले दौर में भारत श्रीलंका के विरुद्ध 69 रनों से हार कर बाहर हो गया था। इसके बाद तो मानो भारत में क्रिकेट खिलाड़ियों पर आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा जिन खिलाड़ियो को आज इतनी इज्जत बख्शी जा रही है, जिनका विजय जूलूस निकाला जा रहा है उनमें से कई खिलाड़ियों को अपने ही देश में रात के अँधेरे में कड़ी सुरक्षा में मुँह छिपाकर लौटना पड़ा था। राँची के जो लोग आज टी-20 के हीरो महेन्द्रसिंह धोनी के गुण गाते नहीं थक रहे हैं उनमें से ही कुछ लोगों ने उस समय धोनी के निर्माणाधीन मकान पर तोड़-फोड़ कर अपना गुस्सा दर्ज कराया था।

कुल मिलाकर कहें तो भारत की जनता का मन भोले-शंभु जैसा है, जो जितनी जल्दी क्रोधित हो जाते हैं, उतनी ही जल्दी खुश भी हो जाते है। इन सब बातों का मतलब यह भी है की इस बार भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को थोड़ा धैर्य रखने की आवश्यकता है। अगर आपको याद हो तो 1983 की विजेता टीम को वर्ल्ड कप जीतने के बाद वेस्टइंडीज से वनडे सिरीज में 0-5 व टेस्ट सिरीज में 0-3 से करारी हार का सामना करना पड़ा था।

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हमारे नए नवेले कप्तान धोनी को भी अभी कई महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं का सामना करना है। इनमें ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के खिलाफ श्रृंखलाएँ अहम हैं। दोनों ही टीमें ट्वेंटी-20 विश्वकप में भारत से मिली करारी हार का बदला चुकाना चाहेंगी, इसके लिए भारतीय टीम को कड़ी मेहनत करनी होगी।

आगामी वनडे सिरीज के लिए इस विश्व विजेता टीम में से कुछ चैंपियन खिलाड़ियों को बाहर जाना होगा। क्योंकि सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और जहीर खान के लिए जगह कौन खाली करता है, यह बहस का मुद्दा रहेगा।

टीम इंडिया ने भी ट्‍वेंटी-20 विश्व कप में सबसे पहले तिरंगा लहराया है। विजेता तो आने वाले समय में कई और भी होंगे पर पहली जीत का स्वाद अलग ही होता है।
आने वाली श्रृंखलाओं के परिणाम का असर धोनी सहित पूरी टीम के करियर पर पड़ेगा। पर यदि हमें 2011 के विश्वकप को पाना है तो हमें इस टीम को हर हाल में समर्थन देना होगा क्योंकि यह अब साबित हो गया है कि जनता से मिले समर्थन व मनोबल से ही जीत हासिल की जा सकती है। बहरहाल आगे जो भी हो पर टी-20 विश्व चैपियन का तमगा तो अब हमसे कोई नहीं छीन सकता।

भारतीय टीम की जीत की तुलना चंद्रमा पर पहुँचने वाले पहले यात्री नील आर्मस्ट्रांग से की जा सकती है। क्योंकि टीम इंडिया ने भी ट्‍वेंटी-20 विश्व कप में सबसे पहले तिरंगा लहराया है। विजेता तो आने वाले समय में कई और भी होंगे पर पहली जीत का स्वाद अलग ही होता है। तो आज मौका है खुशियाँ मनाने का...
लेखक के बारे में
संदीपसिंह सिसोदिया
वन-लाइनर बायो: IIM इंदौर से प्रशिक्षित और 20+ वर्षों का अनुभव रखने वाले डिजिटल मीडिया लीडर व वरिष्ठ संपादक, जिन्होंने BBC,  DW, Yahoo और MSN जैसे वैश्विक संस्थानों के साथ कार्य किया है। वे जियो-पॉलिटिक्स, पर्यावरण और समसामयिक  मुद्दों पर अपने प्रखर लेखन और गहन विश्लेषण के लिए विशेष रूप से.... और पढ़ें