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Written By ND

संभावनाओं की उड़ान

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग
NDND
हवाई जहाज को आकाश में उड़ते हुए भर देखने से आकांक्षाओं और सपनों की इबारतों को मन ही मन प्रत्येक व्यक्ति लिखता जरूर है। हवाई जहाज तो केवल उड़ता भर है पर मनुष्य की कल्पनाएँ उससे परे उड़ान भरती हैं। शायद यही कारण है कि आज आकाश से अंतरिक्ष तक मनुष्य ने अपनी पहुँच आसान कर ली है।

हवाई जहाज उड़ाने की इच्छा प्रत्येक व्यक्ति को बचपन से रहती है पर विमान उड़ाना बच्चों का खेल नहीं। गहन अभ्यास के पूर्व कई परीक्षाओं को पास करना होता है और अंतिम लक्ष्य प्राप्ति तक उड़ान भरने के सपनों को जिलाए रखना पड़ता है। एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का क्षेत्र अपने आप में काफी मेहनत की माँग करता है पर परिणाम काफी अच्छे देता है। इस क्षेत्र में सम्मान है पैसा है और है आकाश में उड़ने की आजादी...

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का क्षेत्र इंजीनियरिंग शिक्षा का सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। इसमें करियर निर्माण की व्यापक संभावनाएँ हैं। इस क्षेत्र में उड्डयन, अंतरिक्ष खोज तथा रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास किया जाता है। यह क्षेत्र डिजाइनिंग, निर्माण, विकास, परीक्षण, ऑपरेशंस और कमर्शियल तथा मिलिट्री एयरक्राफ्ट के अनुरक्षण में सुविज्ञता तथा उनके पुर्जों के साथ-साथ अंतरिक्ष यानों, सैटेलाइट और मिसाइलों के विकास से संबंधित है।

उच्च प्रौद्योगिकी प्रणाली
चूँकि एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बहुत ज्यादा उन्नात प्रौद्योगिकी प्रणाली शामिल है, इसलिए इस क्षेत्र में करियर निर्माण के लिए मैन्युअल, तकनीकी के साथ-साथ यांत्रिकी ज्ञान भी आवश्यक है। आमतौर पर एयरोनॉटिकल इंजीनियर वरिष्ठ इंजीनियरों के अधीन टीम के साथ काम करते हैं, उनसे तकनीकी कौशल अपेक्षित होता है।

हालाँकि इस क्षेत्र में पैसा अच्छा है, लेकिन यह कार्य अत्यधिक अपेक्षाएँ रखता है। एयरोनॉटिकल इंजीनियर को शारीरिक रूप से चुस्त और फिट होना चाहिए साथ ही उसे अपने कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित भी होना जरूरी है। उसे हर समय सतर्क रहना चाहिए, गणितीय परिष्कृतता में दक्ष होना चाहिए।

विशेषताएँ
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की खासियतों में संरचनात्मक अभिकल्पन, नेविगेशनल गाइडेंस एंड कंट्रोल सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन एंड कम्युनिकेशन अथवा प्रोडक्शन मैथड के साथ-साथ मिलिट्री एयरक्राफ्ट, पैसेंजर यान हेलिकॉप्टर, सैटेलाइट और रॉकेट से जुड़े कार्य शामिल हैं।

कार्य एवं अवसर
एयरोनॉटिकल इंजीनियर्स डिजाइन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस के साथ-साथ प्रबंधन और संस्थानों में शिक्षण जैसे कार्य करते हैं। एयरलाइंस, हवाई जहाज निर्माण कारखानों, एयर टर्बाइन प्रोडक्शन प्लांट्स या एविएशन इंडस्ट्री के डिजाइन डेवलपमेंट विभागों में इनके लिए करियर निर्माण के अच्छे अवसर हैं।

स्रोत: नईदुनिया

पात्रता एवं पाठ्यक्रम
एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनने के लिए युवाओं के पास बीई अथवा बी-टेक की ग्रेजुएट डिग्री अथवा कम से कम एयरोनॉटिक्स में डिप्लोमा होना चाहिए। इस क्षेत्र में आईआईटी के अलावा कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों ने डिग्री तथा पोस्ट डिग्री पाठ्यक्रम प्रस्तुत किए हैं। इसके डिप्लोमा पाठ्यक्रम पॉलीटेक्निक में उपलब्ध हैं।

बीई/बी-टेक के लिए मूल पात्रता मापदंड 10+2 अथवा समकक्ष परीक्षा (पीसीएम) में अच्छे प्राप्तांक होना है। आईआईटी के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा तथा बीई के लिए पीईटी परीक्षा के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है।

चयन प्रक्रिया
ग्रेजुएट (बीई/बी-टेक) पाठ्यक्रमों के लिए चयन प्रवेश परीक्षाओं में प्राप्त मेरिट के आधार पर किया जाता है। जिन संस्थानों में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ऐसे अधिकांश संस्थान क्वालिफाइंग ग्रेड के रूप में जेईई स्कोर को मान्य करते हैं। इंस्टीट्यूट ऑव इंजीनियर्स द्वारा आयोजित एसोसिएट मेंबरशिप एक्जामिनेशन (एएमआईई) के माध्यम से निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के कर्मचारी अथवा डिप्लोमाधारी दूरस्थ शिक्षा प्रणाली द्वारा बीई कर सकते हैं।

एएमआईई की परीक्षा एएसआई (द एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑव इंडिया) द्वारा आयोजित की जाती है। यह डिग्री एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग डिग्री के समकक्ष है।

कुछ संस्थानों द्वारा एयरोनॉटिक्स में एम-टेक और पीएचडी पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नोलॉजी भौतिक शास्त्र तथा गणित में बीएससी करने वाले छात्रों को एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑव साइंस (आईआईएस) बंगलोर द्वारा एयरोनॉटिक्‍स में एम-टेक और पीएचडी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

स्रोत: नईदुनिया अवसर

अवधि
भारत सरकार द्वारा अधिमान्य उपाधि चार वर्ष के अध्ययन के बाद प्रदान की जाती है, जबकि डिप्लोमा पाठ्यक्रम दो से लेकर तीन वर्ष की अवधि के होते हैं।

व्यक्तिगत कौशल
एयरोनॉटिकल इंजीनियर्स के पास व्यापक दृष्टिकोण होना चाहिए। उनके पास गणितीय शुद्धता और डिजाइन कौशल, कम्प्यूटर दक्षता और अच्छी संप्रेषण क्षमता होनी चाहिए। उन्हें योजना बनाने तथा दबाव में काम करने का अभ्यास होना चाहिए। उन्हें शारीरिक तथा मानसिक ढंग से स्वस्थ होना चाहिए। उनकी दृष्टि तीक्ष्ण तथा जाँच कार्य में फुर्तीला होना आवश्यक है।

करियर संभावना एवं विकल्प
एयरोनॉटिकल इंजीनियर्स इंजीनियरिंग की सर्वाधिक प्रगत प्रौद्योगिकी शाखाओं में कार्य करते हैं। इस क्षेत्र में एयरक्राफ्ट की डिजाइन तथा विकास के साथ-साथ सैटेलाइट अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जाता है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय/सरकारी/निजी एयरलाइंस के साथ-साथ एयरक्राफ्ट निर्माण इकाइयों में करियर उपलब्ध है।

भारतीय एयरोनॉटिकल इंजीनियरों को इंडियन हेलिकॉप्टर कॉर्पोरेशन ऑव इंडिया, फ्लाइंग क्लबों, निजी तथा सरकारी एयरलाइनों, हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की बंगलोर, नासिक, कोरापुर, कानपुर इकाइयों, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरीज (डीआर डीएल), नेशनल एयरोनॉटिकल लैब, एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट, सिविल एविएशन विभाग के साथ-साथ रक्षा सेवाओं और इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन) में आकर्षक करियर उपलब्ध है।

शुरुआत में इन्हें ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी या जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्ति दी जाती है। इनके ज्वॉइन, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और एप्टीट्यूट के आधार पर इन्हें एयरक्राफ्ट मेंटेनेस, ओवरहॉल या सपोर्ट सेक्शन में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद ये असिस्टेंट एयरक्राफ्ट इंजीनियर्स या असिस्टेंट टेक्नीकल ऑफिसर बन जाते हैं। भविष्य में पदोन्नाति के लिए इन्हें विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती है। बाद में ये प्रशासनिक या एक्जीक्यूटिव पदों पर पदोन्नाति पाते हैं।

वेतनमान
सरकारी क्षेत्रों के एयरोनॉटिकल इंजीनियरों को सरकारी वेतनमान मिलता है, जबकि निजी संस्थानों के इंजीनियर कंपनी प्रबंधन द्वारा निर्धारित वेतन पाते हैं। सरकारी क्षेत्रों का आरंभिक वेतनमान 18000 से 22000 तक होता है, जबकि निजी क्षेत्रों में 25 से 40 हजार तक वेतन दिया जाता है। इसके अलावा एयरलाइंस के इंजीनियरों को मुफ्त हवाई यात्रा के साथ आवास, चिकित्सा जैसी ढेरों सुविधाएँ मिलती हैं।

स्रोत: नईदुनिया अवसर

संस्थान
आईआईटी चेन्नाई, मुंबई, कानपुर तथा खड़गपुर के साथ-साथ पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नोलॉजी द्वारा पीसीएम में बीएससी करने वालों के लिए एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में 3 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम चलाया जाता है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑव साइंस द्वारा एयरोनॉटिक्स में एम-टेक तथा पीएचडी कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण संस्थान

1) इंडियन इंस्टीट्यूट ऑव एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग देहरादून, सी-139, सेक्टर-3, यूनाइटेड फूड प्रोग्राम भवन के पास, करिअप्पा मार्ग, डिफेंस कॉलोनी, देहरादून-248001 (उत्तराखंड)
2) अकेडमी ऑव एयरोस्पेस एंड एविएशन, स्वदेश भवन, 2, प्रेस कॉम्प्लेक्स, एबी रोड, इंदौर (मप्र)
3) बंगलोर इंस्टीट्यूट ऑव एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी, 5, एसआरएस कॉम्प्लेक्स, एनजीईएफ ले-आउट, 80, फीट रोड, नागराबावी, बंगलोर-560072 (कर्नाटक)
4) हिन्दुस्तान कॉलेज ऑव इंजीनियरिंग, पोस्ट बॉक्स न.-01, ओल्ड महाबलीपुरम रोड, पाडुर पोस्ट, केलाम्बक्कम-603103 (तमिलनाडु)
5) हिन्दुस्तान इलेक्ट्रॉनिक्स अकेडमी, 61, कैम्ब्रिज रोड, पो.बा. 806, उलसूर, बंगलोर-560008 (कर्नाटक)
6) हिन्दुस्तान इंस्टीट्यूट ऑव इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, 40, जीएसटी रोड, पो.बॉ. नं. 1306, सेंट थॉमस माउंट, चेन्नाई-600016 (तमिलनाडु)
7) इंडियन इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नोलॉजी मुंबई-400076
8) इंडियन इंस्टीट्यूट ऑव एयरोनॉटिक्स, पटना एयरपोर्ट, पटना-800014 (बिहार)
9) इंस्टीट्यूट ऑव एविएशन टेक्नोलॉजी, 1265, सेक्टर 6, बहादुरगढ़, हरियाणा-124507
10) मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नोलॉजी, अन्नाा यूनिवर्सिटी, क्रोमपेट, चेन्नाई-600044 (तमिलनाडु)

स्रोत: नईदुनिया अवसर