दिल बेचारा के निर्देशक मुकेश छाबड़ा ने की सुशांत सिंह राजपूत के बारे में दिल खोल कर बातें

कुछ एक एक्टर ऐसे होते हैं जिन्हें आप पहली बार मिलते हैं और वह आपको याद रह जाते हैं। बतौर कास्टिंग डायरेक्टर भी कई एक्टर्स को एक ही दिन में मिलते हैं, उनको काम की डिटेल्स देते हैं। उनका ऑडिशन लेते हैं और फिर अगले दिन के लिए आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में का पहला ऑडिशन मुझे याद आता है। सुशांत ऐसा इंसान थे जो मुझे याद रह गए। काय पो चे के ऑडिशन कि मैं बात कर रहा हूं मैंने कई लोगों को बुलाया था और ऐसे में सुशांत एक था। और उसके बाद मुझसे ऐसा लगा कि सुशांत को ही इस रोल के लिए चुना जाना चाहिए क्योंकि उसमें एक एक्स फैक्टर था।
उनका चार्म ऐसा था कि मुझे यूं लगा कि इस रोल के लिए वही सही हैं और बस काय पो चे में लाने और उन्हें चुन लिया। यह कहना है मुकेश छाबड़ा का जो दिल बेचारा के निर्देशक हैं और सुशांत के बहुत करीबी मित्र भी हैं। पिछले महीने 14 जून को फिल्म इंडस्ट्री ने सुशांत सिंह राजपूत को खोया है। उनकी आत्महत्या या हत्या इन सभी पर अभी भी बीच विवाद जारी है।

ऐसे में सुशांत की आखिरी फिल्म फिल्म 'दिल बेचारा' को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज किया जा रहा है। वेबदुनिया से खास बातचीत करते हुए निर्देशक मुकेश छाबड़ा ने सुशांत सिंह राजपूत की कई सारी बातें शेयर की।
मुकेश छाबड़ा बताते हैं कि मुझे बिल्कुल नहीं मालूम था कि सुशांत टेलीविजन में एक्टिंग कर चुके हैं ना ही अमित साध के बारे में जानता था कि वह टेलीविजन एक्टर हैं। फिल्म क्या है किरदार क्या ये समझ लेता हूं जिन्हें महसूस कि ये एक्टर अच्छा लगेगा तो मैं सिलेक्ट करता हूं अपनी फिल्म के लिए ही।

लेकिन मुझे उनके बैकग्राउंड के बारे में मालूम नहीं होता है सुपर 30 के लिए। मृणाल ठाकुर का ही नाम ले लेता हूं जब उन्हें कास्ट किया तो मुझे लड़की पसंद आई रोल के लिए फिट लगी और मैंने उसे ले लिया। फिर बाद में मुझे जाकर मालूम पड़ा कि वह सीरियल भी करती हैं।
इन टेलिविजन एक्टर्स का एक खास पॉइंट होता है जो मुझे बहुत पसंद आता है। वह यह कि वे बड़े ही पाबंद होते हैं, बड़े डिसएप्ल एंड और अनुशासित होते हैं। समय का ध्यान रखते हैं और दिन भर शूट करते रहते हैं तो उनके पूरे शरीर में पूरे सिस्टम में उनकी पूरी बॉडी में एक्टिंग और एक्टिंग से जुड़ी हुई हर बात इतनी बारीकी से घर कर जाती है कि जब टेलीविजन से फिल्म में भी आ जाते हैं तो बहुत अंतर नहीं आता। उस काम को निभाने लग जाते हैं। उस कैरेक्टर को जैसे जी रहे हैं, वह उसमें ऐसे समा जाते हैं कि उन दोनों में अंतर नहीं किया जा सकता है।
सुशांत के बारे में जब आपको मालूम पड़ा तो टीम को कैसे संभाला अपने आप को कैसे संभाला?
सभी लोग परेशान तो थे लेकिन मैं सच कहूं तो पिछले 3 या 4 दिन से मैंने अब बातें करना और याद करना शुरू किया है। मेरे लिए अभी भी नामुमकिन हो जाता है। जब मैं सोचता हूं कि सुशांत मेरे बीच अब है ही नहीं। मुझे लगता है और शायद एक महीना दो महीना तीन महीना छह महीने शायद छह साल तक लग जाएंगे। मुझे ये स्वीकार करने में कि अब सुशांत मेरे पास नहीं है।
संजना को कैसे संभाला, क्योंकि वह उनके लिए भी यह पहली फिल्म है।
संजना का मुझे फोन आया था जैसे ही उसने यह खबर सुनी सुशांत से जुड़ी हुई। उन्होंने मुझे फोन किया तो फोन पर सिर्फ रो रही थी। वह सिर्फ दर्द में बातें कर रही थी और उसमें मुझे कुछ नहीं सोच रहा था क्योंकि मेरे लिए भी उतना ही बड़ा शॉक था। मैं खुद संभाल नहीं पा रहा था और अब सामने संजना जो मेरे लिए किसी बच्चे के समान है। छोटी सी मैं उसे वैसे ही ट्रीट करता हूं क्योंकि उसकी पहली फिल्म भी मैंने ही उसे कास्ट किया था। मैं अपने आप का दुख दर्द परेशानियों को पीछे रखकर पहले इस बच्ची को संभाल रहा था। बस संभाल ही रहा था पर मुश्किल मेरे लिए भी उतना ही था।
संजना की कास्टिंग कि आपने बात कही कैसे की थी, बात कैसे की थी, उनकी कास्टिंग कहां पर हुई थी?
संजना को मैंने रॉकस्टार के लिए कास्ट किया था। हुआ कुछ यूं था कि मैं दिल्ली में था और बहुत सारी स्कूल में जा जाकर बच्चों से मिल रहा था जो कि 13-14 साल के बच्चे रहे होंगे और दिल्ली का बाराखंबा रोड है, वहां पर एक स्कूल है। मॉडल स्कूल वहां पर मैं गया। एक ड्रामा टीचर मेरे मित्र है। उनसे पूछा और फिर उसने मुझे कुछ बच्चों से मिलवाया।
तब मैंने संजना को अपने पास में बुलाकर उनसे कुछ बातें कही। वहीं पर उनका ऑडिशन लिया और मुझे नरगिस की छोटी बहन के रूप में ऐसी ही एक लड़की चाहिए थी। वह 13 साल की थी तो मैंने उन्हें कहा कि मैं तुम्हें इस फिल्म के लिए लेना चाहता हूं। अब 13 साल की बच्ची कैसे कोई डिसीजन ले लेती। उन्होंने कहा, मम्मी से पूछ कर बताती हूं और आज भी उनकी मम्मी का नाम शगुन जी का नाम मेरे मोबाइल नंबर पर ऐसे ही सेव है संजना मदर।
जब यह फिल्म शूट कर आए थे, जाहिर है आपने ऐसा कोई भी वाक्या होगा सोचा भी नहीं था तो असल में क्या सोचा था?
शायद कोई भी नहीं सोचता कि ऐसा अजीब सा नजारा या अजीब सी बात से उस से दो-चार होना पड़ेगा। आप खुश होते हैं कि पहली बार फिल्म बना रहे जब फिल्म पूरी होगी तो उसको ऐसे प्रमोट करेंगे। हीरो के साथ मैं यहां पर जाऊंगा। इस तरीके से उसकी पूरी स्ट्रेटजी को मैं डिसाइड करने वाला हूं और एक्टर है। असिस्टेंट है कई सारे लोग मेरे ही साथ पहली पहली बार काम कर रहे हैं। तो हम लोग बहुत खुशी-खुशी काम कर रहे थे और अब जब यह खबर आ गई है तो क्या कह सकता हूं?

अभी आप कैसा महसूस करते हैं?
कुछ समझ में नहीं आता है। मतलब मुझे नहीं मालूम मुझे क्या महसूस करना चाहिए और क्या नहीं महसूस करना चाहिए। बस अभी मेरे लिए इतना बड़ा लौह है अपने जीवन का, जिसे मैं पूरा नहीं कर पा रहा हूं, आप ही नहीं कर पाता हूं। लेकिन इस बात की खुशी है कि चलो दिल बेचारा को लोगों के सामने पहुंचाना है। वैसे भी सुशांत सिंह राजपूत के ट्रेलर को ही गानों को ही लोगों ने इतना प्यार दिया है कि मुझे लगता ही नहीं कि कोई प्रश्न मेरे ऊपर है बल्कि या मुझे लगता है कि लोग उन्हें हाथों-हाथ लेने वाले हैं। लोग बहुत बेसब्री से इंतजार करने वाले हैं।
सुशांत सिंह राजपूत को लेकर इन दिनों कई लोग पैरानॉर्मल एक्टिविटीज में भी जुड़े हुए हैं देखा आपने?
पता नहीं। मैंने कुछ देखा ही नहीं है। अभी मैं कुछ भी याद नहीं करना चाहता हूं। अभी मैं सारा ध्यान सारा दिल दिमाग 'दिल बेचारा' फिल्म लाने में लगा हुआ हूं ताकि उसके फैंस तक यह फिल्म ला सकूं उसका सपना था ये फिल्म उसे लोगों के सामने लाकर पूरा कर सकूं। बाकी कुछ नहीं सोचता।
फिल्म 24 को रिलीज हो रही हो। 26 जुलाई को कारगिल दिवस है। क्या कोई विश देना चाहेंगे?
अगर आप बुरा ना माने तो मैं कोई बात नहीं कहना चाहता क्योंकि? मैं कुछ ऐसा ना कह दूं कि किसी भी शख्स को बुरा लग जाए।

जी हम समझ सकते हैं आपके मन स्थिति को।
फर्ज कीजिए कभी ऐसा हुआ कि सुशांत आपके सामने आ गए। फिल्म रिलीज हो गई तो क्या शब्द कहना चाहेंगे?
मैं कुछ भी नहीं कहूंगा। बस उसका हाथ पकड़ लूंगा और उसे जाने नहीं दूंगा।



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