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Written By समय ताम्रकर

फिल्मों में जगजीत सिंह

जगजीत सिंह
1976 में जगजीत सिंह का पहला अलबम ‘द अनफॉरगेटेबल्स’ रिलीज हुआ। उस दौर में सिर्फ फिल्म संगीत बिकता था। प्राइवेट एलबम कोई भी कंपनी बड़ी मुश्किल से निकालने को राजी होती थी क्योंकि इनके ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स बड़ी मुश्किल से बिक पाते थे। लेकिन यह एलबम इतना सफल रहा कि गजल आम लोगों के बीच पहुंच गई।

फिल्म निर्माता भी जगजीत की सफलता से चकाचौंध हुए और 1981 में बतौर संगीतकार जगजीत सिंह को फिल्म ‘प्रेम गीत’ मिली। इसके पहले वे एक गुजराती फिल्म, एक बार कहो, गृह प्रवेश जैसी फिल्मों में गा चुके थे।

राज बब्बर-अनिता राज अभिनीत ‘प्रेम गीत’ इस फिल्म को खास सफलता तो नहीं मिली, लेकिन इसका इसमें जगजीत द्वारा संगीतबद्ध किए गीत आज भी सुने जाते हैं। ‘होठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो’ आज भी उतना ही लोकप्रिय है।

1982 में महेश भट्ट ने अपनी फिल्म ‘अर्थ’ में जगजीत सिंह की सेवाएं ली। ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रही हूं...’, ‘झुकी झुकी सी नजर’, ‘कोई ये कैसे बताएं’ बेहद हिट रहे। साथ-साथ में उनके गाए गीत ‘ये तेरा घर ये मेरा घर’, ‘तुमको देखा तो ये खयाल आया’ पसंद किए गए।

सफल संगीत देने के बावजूद जगजीत सिंह को बॉलीवुड ने हाथों-हाथ नहीं लिया। उस दौर में डिस्को चलता था और जगजीत सिंह का संगीत इससे बिलकुल अलग था। बतौर गायक भी यह मान लिया गया कि उनकी आवाज हीरो के ऊपर सूट नहीं होगी। इससे जगजीत सिंह से ज्यादा संगीत प्रेमियों और फिल्म इंडस्ट्री का नुकसान हुआ क्योंकि कई अच्छे गीत और धुनें से वे वंचित रह गए।

शायद फिल्म निर्माता और निर्देशकों के दबाव में काम करना जगजीत को रास नहीं आया और उन्होंने अपने गजल एलबम्स पर ज्यादा ध्यान दिया। बीच में उनके द्वारा संगीतबद्ध फिल्में कालका (1983), रावण (1984) कानून की आवाज (1987) आती रहीं, लेकिन इनका संगीत लोकप्रिय नहीं हुआ। म्युजिक कम्पोजर के बजाय बतौर गायक वे फिल्मों में ज्यादा सफल रहे। हालांकि ये सफलता उनके प्राइवेट एलबम्स को मिली सफलता से बहुत पीछे है।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें