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पाकिस्तान की 'मदर टेरेसा' का निधन

Last Modified:?> Friday, 11 August 2017 (11:30 IST)
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की 'मदर टेरेसा' कहलाने वाली डॉक्टर रूथ फ़ॉ का कराची में हो गया है। वो 87 साल की थीं। डॉ. फ़ॉ ने अपना पूरा जीवन पाकिस्तान में कुष्ठ रोग के उन्मूलन के लिए काम करते हुए बिताया। शुक्रवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वहीं उनका निधन हुआ।
 
डॉ. फ़ॉ ने साल 1960 में पाकिस्तान में कुष्ठ रोग पहली बार देखा और फिर देशभर में क्लिनिक स्थापित करने का मक़सद लेकर लौटीं। उनके प्रयासों की बदौलत ही 1996 में ये घोषणा की जा सकी कि बीमारी अब नियंत्रण में आ गई है।
 
दिल में पाकिस्तान
उनके निधन पर प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने कहा, ''डॉ. फ़ॉ भले ही जर्मनी में पैदा हुई थीं, लेकिन उनका दिल हमेशा पाकिस्तान में रहा।''
 
डॉ. फ़ॉ के साहस और योगदान की तारीफ़ करते हुए प्रधानमंत्री अब्बासी ने कहा, ''डॉ. रूथ उस समय पाकिस्तान आई थीं जब पाकिस्तान के बनने के शुरुआती साल थे। वो यहां कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों का जीवन बेहतर बनाने आई थीं और ऐसा करते हुए वो यहीं की होकर रह गईं।''
 
वुर्ज़बर्ग स्थित रूथ फ़ॉ फ़ाउंडेशन के हेरॉल्ड मेयर पोर्ज़की ने कहा कि डॉ. फ़ॉ ने लाखों लोगों को इज़्ज़त की ज़िंदगी बक्शी। डॉ. फ़ॉ का जन्म लिपज़िक में 1929 को हुआ था। दूसरे विश्व युद्ध में उनका घर बमबारी में तबाह हो गया था। उन्होंने मेडिसीन की पढ़ाई की और बाद में उन्हें दक्षिण भारत जाने का आदेश दिया गया। लेकिन वीज़ा की दिक्कतों के चलते उन्हें कराची में रुकना पड़ा और वहीं उन्होंने पहली बार कुष्ठ रोग के बारे में पता चला।
 
साल 2010 में उन्होंने बीबीसी को बताया था, "मेरा पहला मरीज़ एक युवा पठान था जो हाथों और पैरों के बल घिसट कर चलते हुए मेरी डिस्पेंसरी में आया था और उसी ने मुझे सोचने पर मजबूर किया।" डॉ. फ़ॉ को पाकिस्तान और जर्मनी में कई अवॉर्ड मिले। उन्होंने कुष्ठ रोग से प्रभावित हज़ारों लोगों को नई ज़िंदगी दी।
 
कई सम्मान
उन्होंने पाकिस्तानी डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया और पाकिस्तान के राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम की शुरुआत में और विदेशों से पैसे जुटाने में मदद की। साल 2010 में जब पाकिस्तान में तबाही मचाने वाली बाढ़ आई तो डॉ. फ़ॉ ने उस दौरान भी पीड़ितों की मदद कर काफ़ी तारीफ़ बटोरी।
 
उन्हें पाकिस्तान के दूसरे प्रमुख नागरिक सम्मान हिलाल ए इम्तियाज़ से साल 1979 में नवाज़ा गया। साल 1989 में उन्हें हिलाल ए पाकिस्तान और 2015 में जर्मन स्टॉफ़र मेडल से सम्मानित किया गया। पाकिस्तान में अपने काम के बारे में उन्होंने जर्मन में चार किताबें लिखीं। उनकी किताब 'टू लाइट ए कैंडल' को अंग्रेज़ी में अनुदित किया गया।
 
डॉ. रूथ फ़ॉ का अंतिम संस्कार 19 अगस्त को कराची के सेंट पैट्रिक्स चर्च में किया जाएगा और उसके बाद उन्हें शहर के गोरा क़ब्रिस्तान क्रिस्चियन में दफ़ना दिया जाएगा।
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