shani gochar 2026: वर्ष 2020 में जब शनि ने मकर में प्रवेश किया था तब यह कहा जा रहा था कि अब देश और दुनिया में बहुत बड़ी घटनाएं होने वाली है। सबकुछ बदलने वाला है क्योंकि मकर का शनि बदलाव को लेकर आया है। वर्ष 2020 में करोना महामारी से सबकुछ बदल कर रख दिया। अब यह शनि मेष राशि में जाते-जाते ही कई देशों का भूगोल भी बदल कर रख देगा।
शनि के गोचर से कैसे बदला दुनिया का भविष्य?
1. मकर का शनि: शनि ग्रह जब मकर में आए तो देश और दुनिया में तनाव के साथ ही महामारी का प्रकोप बढ़ा था। शनि ग्रह जब कुंभ में आए तो देश और दुनिया में दो देशों के बीच युद्ध के साथ ही भूकंप, प्राकृतिक आपदा और जलवायु परिवर्तन देखने को मिला था। शनि ने जब 24 जनवरी 2020 में मकर राशि में प्रवेश किया था, तब दुनिया में करोना महामारी का प्रकोप फैल गया था।
2. कुंभ का शनि: फिर शनि ने जब 29 अप्रैल 2022 को कुंभ में प्रवेश किया तब महामारी का दौर खत्म हुआ और दुनियाभर में युद्ध, अराजकता, महंगाई, प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन का नया दौर प्रारंभ हुआ। 28-29 अप्रैल 2022 के दरमियान शनि ग्रह अपनी खुद की राशि मकर से निकलकर खुद ही की राशि कुंभ राशि में प्रवेश किया था। 29 अप्रैल 2022 को शनि ने मकर से निकलकर कुंभ राशि में जब प्रवेश किया तो उसी के आसपास यूक्रेन और रशिया का वार शुरु हो गया। इसके कुंभ गोचर के काल में ही भूकंप और बड़े तूफान के साथ ही अब इजरायल और हमास का युद्ध भी शुरु हो चला है। शनि जब अपना मार्ग बदला तब इजराइल और हमास का युद्ध शुरु हो गया था। युद्ध के लिए शनि और मंगल के साथ ही राहु के गोचर को जिम्मेदार माना जाता है।
इनकी युति या आपसी दृष्टि, वक्री चाल आदि से धरती पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है।
3. मीन का शनि: फिर जब 29 मार्च 2025 को शनि ने मीन राशि में गोचर किया तो हमने देखा भारत और पाकिस्तान का युद्ध, ईरान और इजराइल का युद्ध के साथ ही यूक्रेन और रशिया में फिर से भड़की युद्ध की आग। बड़े बड़े भूकंप, प्लेन हादसे और जंगल में भयानक आग को भी देखा है। इसी बीच गुरु की राशि के शनि ने ज्ञान और विज्ञान में भी कई उन्नति की।
4. मेष का शनि: 9 अगस्त 2027, सोमवार को रात्रि 11:33 बजे शनि मीन राशि में वक्री होंगे और 3 जून 2027, बृहस्पतिवार को 06:23 मिनट पर शनि का मेष राशि में वक्री गोचर होगा और फिर इसी वर्ष शनि वक्री चाल से 20 अक्टूबर को पुन: मीन राशि में लौट आएंगे और 24 दिसंबर को मार्गी हो जाएंगे। पांच माह का यह काल देश और दुनिया के लिए किसी विभिषिका के समान होगा। इस कालखंड में कुछ भयानक होने वाला है। इसके बाद 23 फरवरी 2028, बुधवार को रात्रि 08:00 बजे का पुन: मेष राशि में गोचर होगा। यह युद्ध का चरम समय रहेगा।
अतिचारी गुरु के कारण चल रहा है शनि का दंड:
वर्तमान में गुरु अतिचारी होकर कमजोर हैं इसलिए वे किसी की भी सहायता करने में सक्षम नहीं है। यही कारण है कि धरती पर मौत का तांडव चल रहा है। यूं समझो कि वर्तमान में खुलेआम घूम रहे निरंकुश शनि का दंड चल रहा है। यह शनि बहुत जल्द ही युद्ध की ऐसी आग भड़काएगा कि दुनिया के कई देश इसे आग में जलकर भस्म हो जाएंगे। तख्तापलट, जनविद्रोह और अराजगता के साथ ही मौत का तांडव देखने को मिलेगा। इसी के साथ ही कई देशों के भूगोल यानी नक्क्षे बदल जाएंगे।
अतिचारी बृहस्पति के दौरान वर्ष 2026 में मंगल का मकर राशि में प्रवेश और शनि की वक्री चाल एक 'महादंगल' की ओर इशारा कर रही है। ज्योतिषियों का अनुमान है कि 2026 में भारत एक बड़े युद्ध का हिस्सा बन सकता है, जो 2027 के अंत तक खिंच सकता है। हालांकि, मंगल के गोचर के कारण भारत की सैन्य शक्ति थल, नभ और जल तीनों मोर्चों पर अजेय रहेगी। शत्रुओं की तमाम साजिशों के बावजूद भारत की वैश्विक शक्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि निश्चित है।
विध्वंस से सृजन की ओर: शनि का न्याय 2020 से शुरू हुआ वैश्विक बदलाव का यह सिलसिला 2026 में अपने सबसे कठिन दौर में पहुँचेगा। शनि का मीन राशि में होना पुराने ढांचों को गिराने का काम करेगा। यह कालखंड विनाशकारी भले ही लगे, लेकिन यह एक नई व्यवस्था के सृजन की नींव भी बनेगा। 2028-29 तक शनि की यह गति दुनिया को एक बिल्कुल नए सांचे में ढाल देगी, जहाँ पुराने गठबंधनों का अंत होगा और नई वैश्विक शक्तियों का उदय होगा।