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कीर्तिखाल का भैरवगढ़ी मंदिर: गढ़वाल के रक्षक काल भैरव का धाम, जानें क्या है खास

bhairav gadi mandir
पौड़ी गढ़वाल जिले के कीर्तिखाल में बने भैरव गढ़ी मंदिर को गढ़वाल का रक्षक कहा जाता है। समुद्र तल से 1855 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर ऊंचे पहाड़ों और खूबसूरत गहरी खाइयों की वजह से भी आकर्षण का केंद्र है। इसे लंगूरगढ़ के नाम से भी जाना जाता है।
 
उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, पौड़ी गढ़वाल जिले के कीर्तिखाल गांव में बना भैरव गढ़ी मंदिर नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण पहाड़ों के बीच स्थित है। भैरव जी को गढ़वाल के रक्षक के रूप में जाना जाता है। पौड़ी गढ़वाल जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
 
मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग की स्थापना की गई है, जहां श्रद्धालु बैठकर भजन-कीर्तन करते रहते हैं। कहा जाता है कि काल भैरव को काला रंग पसंद होता है, इसलिए यहां पर मडुवे यानी रागी के आटे का प्रसाद बनाया जाता है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु यहां चांदी का छत्र चढ़ाते हैं।
 

लंगूरगढ़ बहुत ही शक्तिशाली गढ़ था

माना जाता है कि सन 1791 में लंगूरगढ़ बहुत ही शक्तिशाली गढ़ था। उस समय नेपाल की गोरखा सेना ने इस पूरे क्षेत्र पर हमला करके बड़े भूभाग को अपने राज्य में शामिल कर लिया था। लंगूरगढ़ को जीतने के लिए गोरखा सेना ने दो साल तक इसकी घेराबंदी करके रखी। हालांकि गोरखाओं की हार हुई और वह लंगूरगढ़ को छोड़कर भाग गए।
 

समुद्रतल से करीब 1855 मीटर की ऊंचाई पर है मंदिर

भैरव की गुमटी पर बने भैरवगढ़ी मंदिर के बाएं हिस्से में एक शक्तिकुंड भी है। इस क्षेत्र में जब भी किसी की शादी होती है तो नवविवाहित जोड़ा कुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के साथ यहां दर्शनों के लिए पहुंचता है। यह मंदिर समुद्रतल से करीब 1855 मीटर की ऊंचाई पर है।
 

कैसे पहुंचे मंदिर?

लैंसडाउन से करीब 18 किमी दूर इस मंदिर तक जाने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कोटद्वार है जो करीब 35 किमी दूर है और एयरपोर्ट देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है। कीर्तिखाल में होटल की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, यहां पर अब कुछ होमस्टे मिल सकते हैं। गुमखाल और लैंसडाउन में होटल मिल सकते हैं, जिनका किराया सीजन के हिसाब से तय होता है।
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