Paintings 2009 | 2009 : कला की दुनिया पर खास निगाह
2010 में है इन्द्रधनुषी अपेक्षाएँ
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यह बात पूरी ताकत से कही जानी चाहिए कि भारतीय समकालीन कला परिदृश्य में इन दो ऊर्जावान और स्वप्निल चित्रकारों की मौजूदगी युवा कलाकारों के लिए बहुत मायने रखती है। यह बात किसी कोई बात कहने की रियायत के तहत नहीं कही जा रही है बल्कि इसमें वह सच्चा और खरा सच है कि इन दोनों की सतत रचनात्मकता के कारण ही आज समकालीन भारतीय चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न केवल पहचान बल्कि प्रतिष्ठा हासिल हुई है।
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लेकिन इन कलाकारों के अलावा जिन युवा कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की उनमें अतुल डोडिया और सुबोध गुप्ता के नाम निर्विवाद लिए जा सकते हैं। अतुल डोडिया लगातार प्रयोगर्धर्मिता के जरिये नए-नए रूपाकार गढ़ते रहे हैं। उनकी एक पेंटिंग किचन तो एक करोड़ रुपए में बिकी थी। इसी तरह से सुबोध गुप्ता ने इंस्टालेशन के जरिये विश्वस्तर पर सराहना हासिल की। इंग्लैंड और इटली में उनके विशाल इंस्टालेशन को ख्यात समीक्षकों से लेकर कला प्रेमियों ने खासा सराहा था। अमूर्त चित्रकला में प्रभाकर कोलते ने अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप कला यात्रा जारी रखी है तो अंबादास जैसे चित्रकारों ने अमूर्त शैली को गरिमा और आभा दी है। युवा अमूर्त चित्रकारों में मनीष पुष्कले और अखिलेश ने लगातार अपनी ऊर्जावान मौजूदगी का अहसास कराया है।
महिला चित्रकारों में अंजलि इला मेनन ने अपनी खूबसूरत आकृतिमूलक चित्रकृतियों में अपनी अभिनव योजना और संवेदनशीलता से कला को नए आयाम दिए। फिगरेटिव आर्टिस्ट ज्योति बर्मन भी अपनी कला सतत जारी रखे हुए हैं। अपर्णा कौर ने ठेठ भारतीयता से रस और रूप लेकर अपनी चित्रकला को उड़ान दी है। उनके चित्रों ने स्त्री संसार के अनोखे और अनूठे बिम्ब देखे जा सकते हैं। सुजाता बजाज ने अपनी अमूर्त चित्रकृतियों में चटख रंगों का पूरी निर्भीकता से इस्तेमाल किया है और कहीं-कहीं संस्कृति-श्लोकों का इस्तेमाल भी।
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विगत दिनों ही भारत के नामी फोटोग्राफर रघु राय की विशिष्ट फोटो प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। इस प्रदर्शनी में वयोवृद्ध संगीतकारों से लेकर नवोदित संगीतकारों तक के दुर्लभ और आकर्षक छायाचित्र को संजोया गया था।
