बैठक रूम के ये 10 टिप्स नहीं अपनाएं तो होगा नुकसान

drawing room interior
अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: सोमवार, 18 नवंबर 2019 (15:56 IST)
परिवारों के लिए एकजुट होने का स्थान है, जहां वे दिनभर की थकान के बाद कुछ समय एकसाथ बिताना पसंद करते हैं। यहीं बैठकर वे वार्ता या गपशप करते हैं। यहीं बैठकर टीवी देखते हैं या कि भावी योजनाओं पर विचार-विमर्श करते हैं। जब कोई मेहमान आता है तो उसको इसी रूम में बैठाया जाता है। बैठक रूम वास्तु के अनुसार होने से कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है। आओ जानते हैं इसके 10 वास्तु टिप्स।

1.बैठक रूम की दिशा : बैठक रूम कैसा होना चाहिए, यह आपके मकान की दिशा से तय होता है। यदि मकान पूर्व या उत्तरमुखी है तो बैठक रूम को पूर्वोत्तर दिशा अर्थात ईशान कोण में होना चाहिए। यदि मकान पश्चिममुखी है तो बैठक रूम को उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में होना चाहिए। यदि मकान दक्षिणामुखी है तो बैठक रूम को दक्षिण-पूर्व दिशा अर्थात आग्नेय कोण में होना चाहिए।

2.बैठक रूप का आकार : बैठक रूम का आकार वर्गाकार या आयताकार होना चाहिए न कि अंडाकार, गोलाकार या अन्य कोई आकार।

3.बैठक रूम के दरवाजे की दिशा : बैठक रूम का दरवाजा ईशान या उत्तर में है तो उत्तम, पूर्व, पश्‍चिम या वायव्य में है तो मध्यम और अन्य दिशा में है तो निम्नतम माना गया है।

4.बैठक रूम की खिड़कियां : खिड़कियों को बैठक रूम के पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं बहुत लाभकारी हैं।

5.बैठक रूम का रंग-रोगन : दीवारों और टाइल का रंग सफेद, हल्के पीले, हल्के नीले या हरे रंग का होना चाहिए। दीवारों का रंग लाल, गहरा नीला या काले रंग का नहीं होना चाहिए। बैठक रूम में खिड़की और दरवाजे के पर्दे मिलते-जुलते रंगों में ही प्रयोग करें। सोफा सेट के कुशन थोड़े अलग रंग के रखें।


6.बैठक रूम का सोफा सेट : यदि दरवाजा पश्चिम में है तो बैठक रूम के नैऋत्य कोण में सोफा सेट लगाएं। यदि दरवाजा उत्तर में है तो नैऋत्य, दक्षिण या पश्‍चिम में सोफा सेट लगाएं। पूर्व मुखी मकान है तो भी उपरोक्त दिशाओं में ही सोफा सेट लगवाएं। दरअसल, बैठक रूम में उत्तर और ईशान दिशा को छोड़कर कहीं भी सोफा सेट लगाएं।

7. बैठक रूम के चित्र : बैठक रूम में कभी भी नकारात्मक चित्र न लगाएं, जैसे ताजमहल, महाभारत या किसी कांटेदार पौधे का चित्र। जंगली जानवर, रोते हुए बच्चे, नंगे बच्चे, युद्ध के दृश्य, भगवान व पेड़ आदि के चित्र भी न लगाएं। बैठक रूम में हंस की बड़ी-सी तस्वीर लगाएं जिससे कि अपार धन-समृद्धि की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। गृह कलह या वैचारिक मतभेद से बचने के लिए हंसते-मुस्कुराते संयुक्त परिवार का चित्र लगाएं। मेहमान जब आपके में बैठे तो उस कक्ष को देखकर उसका मन एकदम से प्रसन्न हो जाना चाहिए।

8. बैठक रूम में परिवार का मुखिया ऐसे बैठे : बैठक रूप में बैठते वक्त मुखिया का मुख या चेहरा द्वारा की ओर होना चाहिए यदि ऐसा नहीं है तो मेहमान आप पर हावी रहेगा और आप मेहमान के समक्ष समर्पण की मुद्रा में ही रहेंगे। इसके और भी कई नुकसान हो सकते हैं। हो सकता है कि उसमें और आप में किसी बात को लेकर विवाद हो जाए या वैचारिक मतभिन्नता प्रकट हो।

9.बैठक का वातावरण : मौसम के हिसाब से बैठक रूम ठंडा या गर्म रहना चाहिए। यदि आप एक ठंडे क्षेत्रों में रहते हैं और अपने बैठक कक्ष में एक आतिशदान स्थापित करना चाहते हैं तो दक्षिण-पूर्व दिशा चुनना अच्छा है।

10.लोहा या अटाला : कभी भी बैठक रूम में भारी लोहे का सामान या अटाला नहीं रखना चाहिए अन्यथा अतिथि को लगेगा कि उसे बोझ समझा जा रहा है। इस अवस्था में मेहमान तनाव महसूस कर सकता है। बैठक रूप सुंदर फूलों से सजा और कम सामान वाला होना चाहिए।



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