क़द्र खो बैठे तो याद आई बुज़ुर्गों की ये बात,घर किसी के आना-जाना रोज़ का अच्छा नहीं अज़ीज़ अंसारीक़द्र-----सम्मान, आदर, इज़्ज़त बुज़ुर्गों--- समझदार बड़े-बूढ़ों...