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टोक्यो ओलंपिक का रजत पदक नहीं कर पाया भारत के अर्जुन को परास्त, 9-17 से हारा
चांगवन:ISSF (अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ) विश्व कप के मौजूदा टूर्नामेंट में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के युवा निशानाबाज अर्जुन बबूता ने कहा कि फाइनल में ओलंपिक रजत पदक विजेता निशानेबाज की चुनौती होने के बावजूद उनका आत्मविश्वास नहीं डिगा।
बबूता ने फाइनल में जगह बनाने के बाद अपने खेल के स्तर में सुधार करते हुए टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता अमेरिका लुकास कोजेंस्की को 17-9 से हराया।
बबूता ने स्पोर्ट्सफ्लैसेज रेडियो से कहा, सामान्य स्थिति में मुझे लुकास का सामना करने का दबाव महसूस करना चाहिए था लेकिन ऐसा होने पर मैं अपने लक्ष्य से भटक जाता। मैं शांत रहा और खुद पर दबाव को हावी नहीं होने दिया जिससे स्वर्ण जीतने में मदद मिली।
इस विश्व कप में भारत की 32 सदस्यीय टीम भाग ले रही है। यह खेल हालांकि बर्मिंघम में आगामी राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा नहीं होगा। पंजाब के 23 साल के निशानेबाजा को इससे काफी निराशा हुई है।
उन्होंने कही, मैं राष्ट्रमंडल खेलों से निशानेबाजी के बाहर होने के कारण बहुत दुखी हूं। एक नवोदित निशानेबाज के तौर पर राष्ट्रमंडल खेल का अनुभव मेरे लिए बहुत उपयोगी होता और मैं पदक भी जीत सकता था। मुझे आशा है कि अगली बार निशानेबाजी इन खेलों का हिस्सा होगा।(भाषा)
बबूता ने फाइनल में जगह बनाने के बाद अपने खेल के स्तर में सुधार करते हुए टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता अमेरिका लुकास कोजेंस्की को 17-9 से हराया।
बबूता ने स्पोर्ट्सफ्लैसेज रेडियो से कहा, सामान्य स्थिति में मुझे लुकास का सामना करने का दबाव महसूस करना चाहिए था लेकिन ऐसा होने पर मैं अपने लक्ष्य से भटक जाता। मैं शांत रहा और खुद पर दबाव को हावी नहीं होने दिया जिससे स्वर्ण जीतने में मदद मिली।
इस विश्व कप में भारत की 32 सदस्यीय टीम भाग ले रही है। यह खेल हालांकि बर्मिंघम में आगामी राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा नहीं होगा। पंजाब के 23 साल के निशानेबाजा को इससे काफी निराशा हुई है।
