Shravan Mass 2010 | शिवालयों में रहेगी धूम
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सावन मास 27 जुलाई, मंगलवार से प्रारंभ होकर 24 अगस्त श्रावणी पूर्णिमा रक्षाबंधन तक रहेगा। शिव को यह मास अतिप्रिय है। इस दौरान शिवालयों में शिवभक्तों की धूम रहेगी। वहीं सावन के नाम से ही मन में ठंडकभरा भीगा-भीगा एहसास होने लगा है।
चारों ओर प्रकृति हरियाली ओढ़े नजर आती है। प्रकृति को श्रृंगारित देख वन-उपवन में मयूर भी नाचने लगते हैं। मेघों की गर्जन, दामिनी की दमक के बीच राग मेघ मल्हार की तान छेड़ दी जाए तो मन भी मयूर हो उठता है। सावन को लेकर हरदिल में यही गीत गूँज रहे हैं कि अबके सावन ऐसे बरसे...।
वैसे तो सभी शिव नगरियों में बारह महीने रौनक और चहल-पहल रहती है, किंतु शिव के प्रिय मास श्रावण में चारों तरफ शिवमय नजर आती है। पूरे महीने बाबा के भक्त शिव आराधना में जुटे रहेंगे। कोई बिल्वपत्र चढ़ाकर भोले को प्रसन्न करेगा तो कोई भाँग के श्रृंगार से। कोई श्रावण के सोमवार का व्रत रखेगा तो कोई पूरे श्रावण के। कई शिवालयों में धूम रहेगी और हर कहीं शिवनाम की गूँज सुनाई देगी।
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हरियाली अमावस्या पर धानी-मुक्का खेलने की परंपरा है। इस दिन सत्यनारायण के मंदिर और रामघाट पर शिप्रा किनारे हरियाली अमावस्या पर मेला-सा लग जाता है। इसमें बालिकाएँ और युवतियाँ, बुजुर्ग महिलाएँ भी इसमें शामिल होती हैं। एक-दूसरे को पीठ पर मुक्का मारकर जुवार की धानी या गुड़धानी दी जाती है। साथ ही फुगड़ी खेली जाती है और झूले झूलने का इस दिन विशेष महत्व होता है।
सावन मास का नाम सुनते ही वे तमाम गीत याद आ जाते हैं, जो गीतकारों ने सावन मास और सावन के झूलों को लेकर रचे हैं। सावन में झूले झूलने की परंपरा है। शहरों की भाग-दौड़ में लोग इस परंपरा को भूलते जा रहे हैं, लेकिन गाँवों में आज भी सावन बिना झूले के नहीं जाता है और आम की डाली पर झूले डले देखे जा सकते हैं। शहर में भी इस परंपरा के निर्वहन करने वाले एकाध दिन के लिए ही सही, पर झूला डालते और झूलते जरूर हैं।
श्रावण में वैसे तो पूरे मास शिव की आराधना होगी ही, श्रावण के पहले सोमवार से राजाधिराज की सवारी का सिलसिला शुरू होगा। इस बार श्रावण में चार सोमवार हैं। इन चारों सोमवार के अलावा भादौ के दो सोमवार महाकाल नगर भ्रमण करेंगे।
