Operation sindoor effect on stock market: भारत द्वारा 6-7 मई 2025 की रात को पाकिस्तान और POK स्थित आतंकी ठिकानों पर की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद शेयर बाजार में एक स्वाभाविक हलचल देखने को मिली है। ऐसे संवेदनशील समय में, आम निवेशकों के मन में कई सवाल उठना लाजमी है: क्या अब बाजार से दूरी बना लेनी चाहिए? क्या मौजूदा निवेश को बनाए रखना समझदारी है या बेच देना चाहिए? क्या यह नया निवेश करने का सही समय है या नुकसान का सौदा?
अतीत में बाजार की चाल पर एक नजर :
2016 की उरी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एक साल में निफ्टी ने शानदार 11.3% का रिटर्न दिया था। इसी तरह, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भी निफ्टी ने लगभग 8.9% का मुनाफा निवेशकों को दिलाया। यहां तक कि 1999 के करगिल युद्ध के बाद तो निफ्टी में एक साल के भीतर 29.4% तक की मजबूत उछाल दर्ज की गई थी।
इन ऐतिहासिक आंकड़ों से स्पष्ट है कि "ऑपरेशन सिंदूर" जैसे सैन्य अभियानों का असर मुख्य रूप से अल्पकालिक होता है। भारतीय अर्थव्यवस्था और हमारे शेयर बाजारों में इस तरह के तनावों को झेलने और उनसे उबरने की अंतर्निहित शक्ति मौजूद है।
तो, अब निवेशकों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए?
इस स्थिति में निवेशकों को घबराहट में कोई भी जल्दबाजी भरा कदम उठाने से बचना चाहिए। बाजार की अल्पकालिक अस्थिरता को देखकर अपने दीर्घकालिक निवेश लक्ष्यों से भटकना सही नहीं होगा। इसके विपरीत, यह समय शांत रहकर अपनी निवेश रणनीति का आकलन करने और कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देने का है:
• अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें: हर निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता अलग-अलग होती है। यदि आप कम जोखिम लेने वाले निवेशक हैं, तो बाजार की अस्थिरता आपको थोड़ा चिंतित कर सकती है। हालांकि, ऐतिहासिक रुझान बताते हैं कि लंबी अवधि में इक्विटी बाजार अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
• दीर्घकालिक नजरिया रखें: शेयर बाजार में निवेश हमेशा दीर्घकालिक नजरिए से करना चाहिए। एक-दो दिन या कुछ हफ्तों की बाजार की चाल के आधार पर अपने निवेश निर्णय बदलना अक्सर नुकसानदायक साबित होता है।
• अपनी निवेशित कंपनियों के बुनियादी सिद्धांतों पर भरोसा रखें: यदि आपने अच्छी और मजबूत बुनियादी सिद्धांतों वाली कंपनियों में निवेश किया है, तो आपको छोटी अवधि की बाजार की गिरावट से डरने की आवश्यकता नहीं है। ऐसी कंपनियां लंबे समय में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
• विविधीकरण पर ध्यान दें: अपने पोर्टफोलियो को विभिन्न क्षेत्रों और एसेट क्लास में विविधतापूर्ण बनाए रखना हमेशा एक अच्छी रणनीति होती है। यह आपको किसी एक क्षेत्र में होने वाले नुकसान के प्रभाव को कम करने में मदद करता है।
• समझदारी से अवसर तलाशें: बाजार में जब भी बड़ी गिरावट आती है, तो यह कई बार अच्छी गुणवत्ता वाले स्टॉक्स को आकर्षक मूल्यांकन पर खरीदने का अवसर प्रदान करती है। यदि आपकी जोखिम लेने की क्षमता है और आपके पास अतिरिक्त पूंजी है, तो आप ऐसे अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।
• एसआईपी (SIP) जारी रखें: यदि आप व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के माध्यम से निवेश कर रहे हैं, तो इसे जारी रखें। बाजार में गिरावट के दौरान आपको अधिक यूनिट्स कम कीमत पर मिलेंगे, जो लंबी अवधि में आपके रिटर्न को बढ़ाने में मदद करेगा।
• सलाहकारों से परामर्श करें: यदि आप बाजार की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हैं या कोई निर्णय लेने में दुविधा महसूस कर रहे हैं, तो एक वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना हमेशा उचित होता है।
निवेशकों के लिए यह समय पैनिक करने का नहीं, बल्कि धैर्य और समझदारी से अपनी निवेश रणनीति पर टिके रहने का है। यदि बाजार में वॉलेटिलिटी बढ़ती है, तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गुणवत्ता वाले शेयरों को आकर्षक मूल्यों पर खरीदने का एक अवसर भी हो सकता है। इसलिए, अपनी जोखिम क्षमता और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक निर्णय लें और बाजार की अल्पकालिक चालों से प्रभावित न हों।
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