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Written By ND

वैशाख स्नान माह शुरू

महाकाल में गलंतिका बँधन

महाकाल
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चैत्र शुक्ल पूर्णिमा से वैशाख स्नान की शुरुआत हो गई। इसके साथ ही उज्जैन के महाकाल में गलंतिका का भी बँधन होगा। अन्य शिवालयों में गलंतिका बंधन बुधवार से किया जाएगा। वैशाख स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है, वहीं दान धर्म करने का भी महत्व धर्मशास्त्रों में बताया गया है।

ज्योतिषाचार्य पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि इस वर्ष अधिक मास होने के कारण वैशाख स्नान दो माह तक चलेगा। इसका समापन 27 मई को होगा। जो आस्थावान पूरे माह शिप्रा स्नान नहीं कर सकते हैं और यदि वे वैशाख के अंतिम पाँच दिनों में स्नान आदि कर लें तो भी अक्षय फल मिल जाता है। अन्य तीर्थस्थलों की अपेक्षा उज्जैन में वैशाख स्नान का अति विशेष महत्व है।
वैशाख मास में ही यहाँ सिंहस्थ भी भरता है।

इधर महाकाल मंदिर में गलंतिका बँधन होने के साथ ही राजाधिराज पर जल की बूँदें प्रवाहित होने लगेंगी। परंपरानुसार सबसे पहले महाकाल में गलंतिका बँधन होता है जबकि दूसरे दिवस से अन्य शिवालयों में गलंतिका बंधन किया जाता है। महाकाल के पुजारियों के अनुसार महाकाल में चाँदी के पात्र के अलावा मिट्टी के ग्यारह पात्र गलंतिका के रूप में बाँधे जाएँगे। गलंतिका भस्मारती के पश्चात बाँधी जाएगी।
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